यदि हम 2050 की ओर देखें जब हमें दो अरब अधिक लोगों को आहार खिलाने की आवश्यकता होगी, तो यह प्रश्न कि कौन सा आहार सर्वोत्तम है, एक नई अत्यावश्यकता बन गया है। आने वाले दशकों में हम जिन खाद्य पदार्थों को खाने के लिए चुनेंगे, उनके इस ग्रह के लिए गम्भीर रूप से बहुशाखन होंगे। सामान्य रूप से कहें तो समूचे विकासशील देशों में खानपान की जो मांस और डेरी उत्पाद के आहार के गिर्य ही घूमते रहने वाली प्रवृत्ति बढ़ रही है, वह भूमंडलीय संसाधनों पर, अपरिष्कृत अनाज, गिरी, फलों और सब्जियों पर निर्भर करने वाली प्रवृत्ति की तुलना में अधिक दबाव डालेगी।
उपर्युक्त परिच्छेद से क्या निर्णायक सन्देश निकलता है ?
उपर्युक्त परिच्छेद से क्या निर्णायक सन्देश निकलता है ?