यद्यपि मैंने बहुत-सी पुरानी परम्पराओं एवं प्रथाओं को त्याग दिया है और मैं उत्सुक हूँ कि भारत स्वतः उन सभी बेड़ियों को उतार फेंके जो उसे बाँधती हैं, रोकती हैं और उसके लोगों को विभाजित करती हैं, और उनमें से अधिसंख्य लोगों का दमन करती है तथा शरीर एवं आत्मा के स्वतंत्र विकास को रोकती है। यद्यपि मैं ये सब चाहता हूँ फिर भी अपने-आप को अतीत से पूरी तरह काटना नहीं चाहता। मुझे अपनी महान विरासत पर गर्व है जो हमारी रही है और है भी और मैं सचेत हूँ कि मैं भी, हम सभी की तरह, उस अटूट भूखला की कड़ी हूँ जो इतिहास के उषाकाल के भारत के अविस्मरणीय अतीत से संबद्ध है।
लेखक चाहता है कि भारत अपने को अतीत के बंधनों से मुक्त करे, क्योंकि
लेखक चाहता है कि भारत अपने को अतीत के बंधनों से मुक्त करे, क्योंकि