जलवायु परिवर्तन का निवारण करने की सभी कार्यवाहियों में अंततः लागत अंतर्निहित होती है। भारत जैसे देशों के लिए अनुकूलन तथा प्रशमन योजनाओं और परियोजनाओं को अभिकल्पित एवं कार्यान्वित करने के लिए वित्तपोषण उचित रूप से बहुत अहम है। भारत जैसे विकासशील देश के लिए, जो कि जलवायु परिवर्तन की सर्वाधिक मार झेलनेवालों में से एक होगा, वित्तीय विकास की इसकी आवश्यकताओं को देखते हुए, यह समस्या और भी गंभीर है। अधिकतर देश निश्चित ही जलवायु परिवर्तन को वास्तविक खतरे के रूप में देखते हैं और अपने पास के सीमित संसाधनों को अधिक व्यापक और एकीकृत तरीके से प्रयोग कर इसके निवारण का प्रयास कर रहे हैं।
उपर्युक्त परिच्छेद के संदर्भ में, निम्नलिखित पूर्वधारणाएँ बनाई गई हैं :
- जलवायु परिवर्तन, विकसित देशों के लिए चुनौती नहीं है।
- अनेक देशों के लिए, जलवायु परिवर्तन एक जटिल नीतिगत मुद्दा है और एक विकास का मुद्दा भी।
- वित्तीय तरीके और साधन खोजने होंगे ताकि विकासशील देश अपनी अनुकूलन क्षमता बढ़ा सकें।
उपर्युक्त में से कौन-सी पूर्वधारणा/पूर्वधारणाएँ वैध है/हैं?
उपर्युक्त परिच्छेद के संदर्भ में, निम्नलिखित पूर्वधारणाएँ बनाई गई हैं :
- जलवायु परिवर्तन, विकसित देशों के लिए चुनौती नहीं है।
- अनेक देशों के लिए, जलवायु परिवर्तन एक जटिल नीतिगत मुद्दा है और एक विकास का मुद्दा भी।
- वित्तीय तरीके और साधन खोजने होंगे ताकि विकासशील देश अपनी अनुकूलन क्षमता बढ़ा सकें।
उपर्युक्त में से कौन-सी पूर्वधारणा/पूर्वधारणाएँ वैध है/हैं?