भारत की शिक्षा प्रणाली उस व्यापक शिक्षा प्रणाली के नमूने पर बनी है जो यूरोप में 19वीं शताब्दी में विकसित हुई और बाद में विश्व में फैल गई। इस व्यवस्था का उद्देश्य है कि बच्चों को 'अच्छे' नागरिक और उत्पादक श्रमिक के रूप में अनुकूलित किया जाए। यह व्यवस्था औद्योगिक युग के लिए उपयुक्त थी जिसमें सीमित क्षमतावाले अनुपालनकर्ता श्रमिकों की लगातार पूर्ति की माँग थी। हमारे शिक्षण संस्थान ऐसे कारखानों की तरह हैं जिनमें घंटियाँ होती हैं, वर्दियाँ होती हैं और शिक्षार्थियों के जत्थे तैयार किए जाते हैं, ऐसे शिक्षार्थी जो अनुपालन के लिए ही बनाए जा रहे हैं। किन्तु, आर्थिक दृष्टिकोण से वर्तमान वातावरण पूर्णतः भिन्न
है। यह एक जटिल, अस्थिर एवं भूमंडलीय रूप से अंतःसंबंधित संसार है।
54. उपर्युक्त परिच्छेद के संदर्भ में, निम्नलिखित पूर्वधारणाएँ बनाई गई हैं :
54. उपर्युक्त परिच्छेद के संदर्भ में, निम्नलिखित पूर्वधारणाएँ बनाई गई हैं :
- भारत अपनी त्रुटिपूर्ण शिक्षा प्रणाली के कारण तत्त्वतः विकासशील देश बना हुआ है।
- आज के शिक्षार्थियों के लिए नए युग के कौशल-समूह प्राप्त करना आवश्यक है।
- काफी संख्या में भारतीय शिक्षा प्राप्त करने के लिए कुछ विकसित देशों में जाते हैं क्योंकि वहाँ की शिक्षा प्रणालियाँ उन समाजों का पूर्ण प्रतिबिम्ब है जिनमें वे कार्य करती हैं।
उपर्युक्त में से कौन-सी पूर्वधारणा/पूर्वधारणाएँ वैध है/हैं?
54. उपर्युक्त परिच्छेद के संदर्भ में, निम्नलिखित पूर्वधारणाएँ बनाई गई हैं :
- भारत अपनी त्रुटिपूर्ण शिक्षा प्रणाली के कारण तत्त्वतः विकासशील देश बना हुआ है।
- आज के शिक्षार्थियों के लिए नए युग के कौशल-समूह प्राप्त करना आवश्यक है।
- काफी संख्या में भारतीय शिक्षा प्राप्त करने के लिए कुछ विकसित देशों में जाते हैं क्योंकि वहाँ की शिक्षा प्रणालियाँ उन समाजों का पूर्ण प्रतिबिम्ब है जिनमें वे कार्य करती हैं।
उपर्युक्त में से कौन-सी पूर्वधारणा/पूर्वधारणाएँ वैध है/हैं?