जलवायु परिवर्तन का सामना करने और उत्पादक कृषि, वानिकी तथा मत्स्यपालन को सुनिश्चित करने के लिए प्राकृतिक परिसम्पत्तियों की विविधता की आवश्यकता होगी। उदाहरण के लिए, ऐसी फसल किस्मों की आवश्यकता है जो सूखा, गर्मी और बढ़ी हुई के अंतर्गत अच्छा निष्पादन करें। लेकिन फसलों को चुनने के लिए निजी-क्षेत्र और किसान-प्रेरित प्रक्रिया अतीत अथवा वर्तमान दशाओं में अपनाई गई एकरूप किस्मों का समर्थन करती है न कि उन किस्मों का जो अपेक्षाकृत गर्म, आर्द्र अथवा शुष्क दशाओं में सतत उच्च उत्पादन देने में समर्थ हैं। वर्तमान फसलों, नस्लों और उनके वन्य संबंधियों के आनुवंशिक संसाधनों की अपेक्षाकृत व्यापक निकायों (पूल) को संरक्षित रखने के लिए त्वरित प्रजनन कार्यक्रमों की आवश्यकता है। अपेक्षाकृत अक्षुण्ण पारितंत्रों, जैसे कि बनारोपित जलग्रहण-क्षेत्र, मैंग्रोव, आर्द्रभूमियाँ जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को रोक सकते हैं। बदलती हुई जलवायु के अंतर्गत ये पारितंत्र स्वयं संकट में हैं और प्रबंधन उपागमों को अपेक्षाकृत अधिक पूर्व-सक्रिय और अनुकूली बनाना होगा। प्राकृतिक क्षेत्रों के बीच के संयोजनों, जैसे कि प्रवासन गलियारों, की आवश्यकता जातियों की गतिशीलता सुकर बनाने के लिए होगी जिससे कि जलवायु परिवर्तन का सामना किया जा सके।
30. उपर्युक्त परिच्छेद के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-से, जलवायु परिवर्तन का सामना करने के लिए सहायक होंगे?
30. उपर्युक्त परिच्छेद के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-से, जलवायु परिवर्तन का सामना करने के लिए सहायक होंगे?
30. उपर्युक्त परिच्छेद के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-से, जलवायु परिवर्तन का सामना करने के लिए सहायक होंगे?