आहार-नियंत्रण (डाइटिंग) का प्रचलन महामारी बन चुका है; हर कोई एक श्रेष्ठ शरीर प्राप्त करने के तरीके की तलाश में है। हम सभी संजातीयता, आनुवंशिकी, पारिवारिक इतिहास, लिंग, आयु, शारीरिक और मानसिक तथा आध्यात्मिक स्वास्थ्य स्थिति, जीवनशैली एवं वरीयता के संदर्भ में भिन्न हैं। इस कारण से हम किस आहार को सहन कर सकते हैं या किस आहार के प्रति संवेदनशील हैं, इस मामले में भी भिन्न हैं। अतः हम वास्तव में अनेक जटिलताओं में कमी एक आहार या आहार-पुस्तिका में नहीं ला सकते। यह विश्वभर में मोटापे पर नियंत्रण रखने में आहारों (डाइट) की विफलता को स्पष्ट करता है। जब तक वजन बढ़ने के कारणों को भली-भाँति समझा नहीं जाएगा और उन्हें दूर नहीं किया जाएगा और जब तक आदतों को स्थायी तौर पर बदला नहीं जाएगा, कोई भी आहार शायद सफल नहीं होगा।
उपर्युक्त परिच्छेद से कौन-सा सर्वाधिक तार्किक और तर्कसंगत निष्कर्ष (इंफरेंस) निकाला जा सकता है?
उपर्युक्त परिच्छेद से कौन-सा सर्वाधिक तार्किक और तर्कसंगत निष्कर्ष (इंफरेंस) निकाला जा सकता है?