‘मरुभवन (डेजर्टिफिकेशन)’ किसी पारितंत्र की जैव उत्पादकता के हास की उस प्रक्रिया की व्याख्या करने वाला शब्द है, जिसके परिणामस्वरूप उत्पादकता की संपूर्ण हानि हो जाती है। यद्यपि यह घटना प्रायः शुष्क, अर्धशुष्क और अल्पाई पारितंत्रों से जुड़ी हुई है, तथापि आर्द्र उष्णकटिबंधों में भी इसका प्रभाव अत्यंत नाटकीय हो सकता है। मानव-प्रभावित स्थलीय पारितंत्रों का दरिद्रण (इंपोवरिशमेंट) विविध रूपों में दिख सकता है : त्वरित अपरदन, जैसा कि देश के पर्वतीय क्षेत्रों में है; भूमि का लवणीभवन, जैसा कि देश के अर्धशुष्क और शुष्क ‘हरितक्रांति’ क्षेत्रों, उदाहरणार्थ हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में है और स्थल गुणता हास, जो कि भारत के सभी मैदानों पर वनस्पति-आच्छादन के व्यापक हास और धान/गेहूँ की एकरस एकधान्य कृषि के कारण होने वाली एक आम घटना है। वनोन्मूलन का एक प्रमुख दुष्परिणाम जलविज्ञान में प्रतिकूल परिवर्तनों और संबंधित मृदा और पोषकों की हानियों से संबंधित है। वनोन्मूलन के दुष्परिणाम निरपवाद रूप से अपरदनकारी हानियों के माध्यम से होने वाले स्थल अवक्रमण के कारण उत्पन्न होते हैं। उष्णकटिबंधीय एशिया, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका में अपरदन उच्चतम स्तर पर हैं। उष्णकटिबंधों पर पहले
से ही इसकी उच्च दरें वनोन्मूलन के, और वनों के नष्ट हो जाने के उपरांत किए जाने वाले बेमेल भूमि-प्रबंधन प्रणालियों के कारण चिंताजनक दर से बढ़ रही हैं (उदाहरणार्थ, भारतीय संदर्भ में प्रमुख नदीतंत्रों—गंगा और ब्रह्मपुत्र के माध्यम से)। पर्वत के संदर्भ में, पर्वतीय मृदा का कम होता जा रहा आर्द्रता-धारण, हिमालयी क्षेत्र में अंतर्भीम झरनों और अपेक्षाकृत छोटी नदियों के सूखते जाने का श्रेय वन-आच्छादन में आए उग्र परिवर्तनों को दिया जा सकता है। एक अप्रत्यक्ष परिणाम, जल के माध्यम से होने वाले उच्चभूमि-निम्नभूमि की अन्योन्यक्रिया में आया उग्र बदलाव है। असम के चायरोंपण करने वालों की तात्कालिक चिंता ब्रह्मपुत्र के कछारों के साथ आने वाले बारम्बार आप्लावन के कारण चाय-बागानों को होने वाली क्षति के बारे में है, एवं चाय-बागान की क्षति और परिणामस्वरूप होने वाली चाय उत्पादकता की हानि, नदीतंत्र के बदलते मार्ग और गाद-भराई (सिल्टेशन) के कारण नदी-तल के बढ़ते जाते स्तर के कारण हैं। स्थल मरुभवन के अंतिम परिणाम हैं : मृदा निम्नीकरण, उपलब्ध जल और उसकी गुणता में परिवर्तन, और इसके परिणामस्वरूप, ग्रामीण समुदाय के आर्थिक कल्याण के लिए आवश्यक खाद्य, चारा और ईंधन-काष्ठ उत्पादन में होने वाला हास।
27. इस परिच्छेद के अनुसार, निम्नलिखित में से कौन-से वन-आच्छादन में आए हास के परिणाम हैं?
29. 'मरुभवन' के संदर्भ में, जैसा कि परिच्छेद में वर्णन किया गया है, निम्नलिखित पूर्वधारणाएँ बनाई गई हैं :
- मरुभवन, केवल उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों की एक घटना है।
- बाद और मरुभवन, वनोन्मूलन के अनिवार्य परिणाम हैं।
उपर्युक्त में से कौन-सी पूर्वधारणा/पूर्वधारणाएँ वैध है/हैं?
29. 'मरुभवन' के संदर्भ में, जैसा कि परिच्छेद में वर्णन किया गया है, निम्नलिखित पूर्वधारणाएँ बनाई गई हैं :
- मरुभवन, केवल उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों की एक घटना है।
- बाद और मरुभवन, वनोन्मूलन के अनिवार्य परिणाम हैं।
उपर्युक्त में से कौन-सी पूर्वधारणा/पूर्वधारणाएँ वैध है/हैं?