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Q. 6
DiscussAttempt

सामान्य रूप में, धार्मिक परम्पराएँ ईश्वर के या किसी सार्वभौम नैतिक सिद्धांत के प्रति हमारे कर्तव्य पर बल देती हैं। एक दूसरे के प्रति हमारे कर्तव्य इन्हीं से व्युत्पन्न होते हैं। अधिकारों की धार्मिक संकल्पना मुख्यतः इस देवत्व या सिद्धान्त के साथ हमारे संबंध से, और हमारे अन्य संबंधों पर पड़ने वाले इसके निहितार्थ से ही व्युत्पन्न हुई है। अधिकारों और कर्तव्यों के बीच यह संगतता न्याय के किसी उच्चतर बोध के लिए महत्वपूर्ण है। किन्तु, न्याय को आचरण में लाने के लिए, सद्गुण, अधिकार और कर्तव्य औपचारिक अमूर्त तत्व नहीं रह सकते। उन्हें सामान्य मिलन (कम्युनियन) के संवेदन से बंधे हुए समुदाय (सामान्य एकता) में उतारना परमावश्यक है। वैयक्तिक सद्गुण के रूप में भी यह एकात्मता, न्याय की साधना और बोध के लिए आवश्यक है।

निम्नलिखित में कौनसा एक, इस परिच्छेद का मर्म है ?

A

एक-दूसरे के प्रति हमारे कर्तव्य हमारी धार्मिक परम्पराओं से व्युत्पन्न होते हैं

B

दिव्य सिद्धांत से संबंध रखना महान सद्गुण है

C

अधिकारों और कर्तव्यों के बीच सन्तुलन समाज में न्याय दिलाने के लिए निर्णायक है

D

अधिकारों की धार्मिक संकल्पना मुख्यतः ईश्वर के साथ हमारे संबंध से व्युत्पन्न हुई है

Kepler. Discussing PYQs. Q.no. 6