checking user
checking user
checking user
checking user
Q. 71
DiscussAttempt

ऐतिहासिक रूप से, विश्व-कृषि के सामने, खाद्य की मांग और पूर्ति के बीच संतुलन प्राप्त करना सबसे बड़ी चुनौती रही है। वैयक्तिक देशों के स्तर पर, मांग-पूर्ति संतुलन बंद अर्थव्यवस्था के लिए एक निर्णायक नीतिगत मुद्दा हो सकता है, विशेषकर, यदि वह एक जनसंख्याबहुल अर्थव्यवस्था है और उसकी घरेलू कृषि, स्थायी आधार पर पर्याप्त खाद्य पूर्ति नहीं कर पा रही है। यह उस मुक्त और बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था के लिए, जिसके पास विदेशों से खाद्य क्रय करने हेतु पर्याप्त विनिमय अधिशेष है, उतनी बड़ी, और न ही सदैव होने वाली, बाध्यता है। विश्व के लिए समग्र रूप से, मांग-पूर्ति संतुलन, भूख तथा भुखमरी से बचाव हेतु, सदैव ही एक अपरिहार्य पूर्व-शर्त है। तथापि, पर्याप्त पूर्ति की विश्वव्यापी उपलब्धता का आवश्यक रूप से यह मतलब नहीं है कि खाद्य स्वतः अधिशेष वाले देशों से उन अभावग्रस्त देशों की ओर, जिनके पास क्रय-शक्ति का अभाव है, चला जाएगा। अतः विश्व स्तर पर भूख, भुखमरी, न्यून पोषण या कुपोषण आदि का असमान वितरण, खाली जेबों वाले भूखे लोगों की मौजूदगी की वजह से है, जो वृहद रूप में अविकसित अर्थव्यवस्थाओं तक सीमित हैं। जहाँ तक आधारभूत मानवीय अस्तित्व के लिए "दो वक्त का भरपेट भोजन" का प्राथमिक महत्व है, उसमें खाद्य की विश्वव्यापी पूर्ति के मुद्दे को, हाल के वर्षों में, महत्व मिलता रहा है, क्योंकि मांग की मात्रा और संरचना दोनों में बड़े परिवर्तन हो रहे हैं, और क्योंकि हाल के वर्षों में अलग-अलग देशों की खाद्य-पूर्तियों की अबाधित भृंखला निर्मित करने की क्षमताओं में कमी आई है। खाद्य-उत्पादन, विपणन और कीमतें, विशेषकर विकासशील विश्व में गरीबों द्वारा कीमत वहन करने की क्षमता, विश्वव्यापी मुद्दे बन गए हैं, जिनका विश्वव्यापी चिंतन और विश्वव्यापी समाधान आवश्यक है।

विश्वव्यापी खाद्य-पूर्ति के मुद्दे को मुख्यतः किसके/किनके कारण महत्व प्राप्त हुआ है ?

  1. विश्वव्यापी रूप से जनसंख्या की अतिवृद्धि
  2. खाद्य-उत्पादन के क्षेत्र में तीव्र गिरावट
  3. सतत खाद्यपूर्ति हेतु क्षमताओं में परिसीमन

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये :

A

केवल 1 और 2

B

केवल 3

C

केवल 2 और 3

D

1, 2 और 3

Kepler. Discussing PYQs. Q.no. 71