शक्ति, ऊष्मा और परिवहन के ईंधन के रूप में जैवमात्रा (बायोमास) की न्यूनीकरण समर्थता सभी नवीकरणीय स्रोतों से अधिक है। यह कृषि और वन अवशिष्टों, साथ ही ऊर्जा-फसलों से प्राप्त होती है। जैवमात्रा अवशिष्टों का उपयोग करने में सबसे बड़ी चुनौती शक्ति-संयंत्रों में उचित लागत पर की जानेवाली उनकी विश्वसनीय दीर्घावधि पूर्ति ही है, मुख्य समस्याएं सुप्रचालनिक (लॉजिस्टिकल) अवरोध और ईंधन-संग्रहण की लागत हैं। यदि ऊर्जा-फसलों का उचित रीति से प्रबंधन न हो तो, वे अन्न उत्पादन के साथ प्रतिस्पर्धा करती हैं और अन्न की कीमतों पर उनका अवाञ्छित असर पड़ सकता है। जैवमात्रा का उत्पादन परिवर्तनशील जलवायु के भौतिक प्रभावों के प्रति भी संवेदनशील होता है।
जब तक नव-प्रीथोगिकियाँ उत्पादकता को सारभूत रूप में न बढ़ाएँ, तब तक धारणीय जैवमात्रा पूर्ति की सीमाओं को देखते हुए, जैवमात्रा की भावी भूमिका का संभवतः वास्तविकता से अधिक अनुमान लगाया गया है। जलवायु-ऊर्जा प्रतिरूप यह प्रकल्पित करते हैं कि 2050 में बायोमास का उपयोग लगभग चारगुना बढ़ कर 150 – 200 एक्साजूल हो सकता है जो कि विश्व की प्राथमिक ऊर्जा या लगभग एक-बीथार्ड है। परन्तु खाद्य एवं वन्य संसाधनों का कोई विनाश किए बिना, 2050 तक प्रतिवर्ष बायोमास संसाधनों की अधिकतम धारणीय तकनीकी क्षमता (अवशिष्ट और ऊर्जा फसल दोनों) 80 – 170 एक्साजूल के परिसर में होगी और इसका सिर्फ एक अंश वास्तविक और आर्थिक रूप से साध्य होगा। इसके अतिरिक्त, कुछ जलवायु प्रतिरूप ऋणात्मक उत्सर्जन प्राप्त करने और शताब्दी के पूर्वार्ध में कुछ मुहलत जुटाने के लिए बायोमास आधारित कार्बन प्रग्रहण एवं संचयन पर, जो कि एक अप्रमाणित प्रौद्योगिकी है, आश्रित है।
कुछ द्रव्य जैवईंधन जैसे मकई आधारित इथेनोल, प्रमुख रूप से परिवहन हेतु, जीवन चक्र आधार पर कार्बन उत्सर्जनों में सुधार लाने की जगह उन्हें और बढ़तर कर सकते हैं। लिग्नो-सेलुलोजिक चारा आधारित दूसरी पीढ़ी के कुछ जैवईंधन जैसे कि पुआल, खोई, घास और काष्ठ ऐसे धारणीय उत्पादन की सम्भाव्यता रखते हैं जो उच्च उत्पादकता वाले हैं तथा ग्रीनहाउस गैस के निम्न स्तर का उत्सर्जन करें, किन्तु वे अभी तक अनुसंधान और विश्लेषण के चरण में हैं।
इस परिच्छेद के सन्दर्भ में, निम्नलिखित पूर्वधारणाएँ बनाई गई हैं :
- कुछ जलवायु-ऊर्जा प्रतिरूप यह सुझाते हैं कि शक्ति-जनन के ईंधन के रूप में बायोमास का उपयोग ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जनों को कम करने में सहायक होता है
- शक्ति-जनन के ईंधन के रूप में बायोमास का उपयोग करना, खाद्य एवं वन संसाधनों को बाधित किए बिना संभव नहीं है
इन पूर्वधारणाओं में कौनसी वैध है/हैं ?
इस परिच्छेद के सन्दर्भ में, निम्नलिखित पूर्वधारणाएँ बनाई गई हैं :
- कुछ जलवायु-ऊर्जा प्रतिरूप यह सुझाते हैं कि शक्ति-जनन के ईंधन के रूप में बायोमास का उपयोग ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जनों को कम करने में सहायक होता है
- शक्ति-जनन के ईंधन के रूप में बायोमास का उपयोग करना, खाद्य एवं वन संसाधनों को बाधित किए बिना संभव नहीं है
इन पूर्वधारणाओं में कौनसी वैध है/हैं ?