जलीय चक्र में जैव-विविधता की भूमिका की समझ बेहतर नीति-निर्माण में सहायक होती है। जैव-विविधता शब्द अनेक किस्मों के पादपों, प्राणियों, सूक्ष्मजीवों को और उन पारितंत्रों को, जिसमें वे पाए जाते हैं, निर्दिष्ट करता है। जल और जैव-विविधता एक दूसरे पर निर्भर हैं। वास्तव में, जलीय चक्र से यह निश्चित होता है कि जैव-विविधता कैसे कार्य करती है। कम से, वनस्पति और मृदा जल के प्रवाह को निर्धारित करते हैं। हर एक गिलास जल जो हम पीते हैं, कम से कम उसका कोई अंश, मछलियों, वृक्षों, जीवाणुओं, मिट्टी और अन्य जीवों (ऑर्गेनिज्म्स) से होकर गुज़रा होता है। इन पारितंत्रों से गुज़रते हुए वह शुद्ध होता है और उपभोग के लिए उपयुक्त होता है। जल की पूर्ति एक महत्वपूर्ण सेवा है जो पर्यावरण प्रदान करता है।
उपर्युक्त परिच्छेद से निम्नलिखित में से कौनसा सर्वाधिक निर्णायक निष्कर्ष (इन्फरेंस) निकाला जा सकता है ?
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