वायुमंडल में मानव निर्मित कार्बन डाईऑक्साइड के बढ़ने से पादपों और सूक्ष्मजीवों के बीच एक भृंखला अभिक्रिया प्रारंभ हो सकती है जो कि इस ग्रह पर कार्बन के सबसे बड़े भंडार—मृदा को अव्यवस्थित कर सकती है। एक अध्ययन में यह पाया गया कि वह मृदा जिसमें कार्बन की मात्रा, सभी पादपों और पृथ्वी के वायुमंडल में उपस्थित कुल कार्बन की दुगुनी है, लोगों के द्वारा वायुमंडल में और अधिक कार्बन छोड़ते जाने पर वर्धमान रूप से अस्थिर होती जाएगी। ऐसा अधिकांशतः पादपवृद्धि में बढ़ोत्तरी के कारण होता है। यद्यपि कार्बन डाईऑक्साइड एक ग्रीनहाउस गैस और एक प्रदूषक है, यह पादपवृद्धि को प्रोत्साहित भी करती है। चूंकि वृक्ष और दूसरी बनस्पतियाँ भविष्य में होने वाली कार्बन डाईऑक्साइड की प्रचुरता में फलती-फूलती हैं, उनकी जड़ें मृदा में सूक्ष्मजीवों की क्रियाशीलता को प्रेरित कर सकती हैं जो परिणामस्वरूप मृदा-कार्बन के अपघटन को और तेज कर वायुमंडल में कार्बन डाईऑक्साइड के उत्सर्जन में वृद्धि कर सकती है।
निम्नलिखित में से कौन सा, उपर्युक्त परिच्छेद का सबसे अधिक तर्कसंगत उपनिगमन (कोरोलरी) है ?
निम्नलिखित में से कौन सा, उपर्युक्त परिच्छेद का सबसे अधिक तर्कसंगत उपनिगमन (कोरोलरी) है ?