मानव विकास की प्रगति बनाए रखने के सामने सबसे बड़ा खतरा इस रूप में दिखाई देता है कि उत्पादन और उपभोग के स्वरूप में दिनोंदिन अधारणीयता बढ़ती जा रही है। वर्तमान उत्पादन मॉडल जीवाश्म ईंधनों पर बहुत अधिक निर्भर है। अब हम जानते हैं कि यह स्वरूप अधारणीय है, क्योंकि ये संसाधन सीमित हैं। मानव विकास को सही अर्थों में धारणीय बनाने के लिए आर्थिक संवृद्धि और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के बीच की घनिष्ठ संबद्धता को पृथक् करने की जरूरत है। कुछ विकसित देशों ने पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) का प्रसार कर और सार्वजनिक परिवहन तथा आधारिक संरचना में निवेश कर इनके अति दुष्प्रभावों को कम करना आरंभ कर दिया है। किन्तु अधिकांश विकासशील देशों को परिष्कृत ऊर्जा स्रोत की ऊँची कीमतों और अल्प उपलब्धता के कारण बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। विकसित देशों को चाहिए कि वे विकासशील देशों के धारणीय मानव विकास की ओर जाने में सहायक बनें।
1. निम्नलिखित में से किसके/किनके कारण उत्पादन के स्वरूप में अधारणीयता है?
2. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
विकसित देश, विकासशील देशों के धारणीय मानव विकास की ओर जाने में सहायक हो सकते हैं
- कम लागत पर परिष्कृत ऊर्जा स्रोत उपलब्ध करा कर
- उनके सार्वजनिक परिवहन के सुधार के लिए नाममात्र ब्याज दरों पर ऋण उपलब्ध करा कर
- उन्हें अपने उत्पादन और उपभोग के स्वरूपों को बदलने के लिए प्रोत्साहित कर
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
2. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
विकसित देश, विकासशील देशों के धारणीय मानव विकास की ओर जाने में सहायक हो सकते हैं
- कम लागत पर परिष्कृत ऊर्जा स्रोत उपलब्ध करा कर
- उनके सार्वजनिक परिवहन के सुधार के लिए नाममात्र ब्याज दरों पर ऋण उपलब्ध करा कर
- उन्हें अपने उत्पादन और उपभोग के स्वरूपों को बदलने के लिए प्रोत्साहित कर
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?