विश्व में कुछ जगहों पर चावल और गेहूँ जैसे प्रमुख खाद्यान्नों की उत्पादकता स्थिरता की सीमा तक पहुँच गई है। उपज को न तो नई किसमें और न ही अनोखे कृषि-रसायन बढ़ा रहे हैं। न ही अब ऐसी काफी जमीनें बची हैं जिन पर खेती न हुई हो और उन पर कृषि करना उपयुक्त हो। यदि वैश्विक तापमान का बढ़ना जारी रहा, तो कुछ स्थान कृषि के लिए अनुपयुक्त हो जाएंगे। प्रौद्योगिकी का उपयोग इन समस्याओं को दूर करने में सहायक हो सकता है। कृषि प्रौद्योगिकी बहुत तेजी से बदल रही है। बहुत-सा यह परिवर्तन पश्चिमी जगत्/अमरीका के संपन्न किसानों द्वारा लाया जा रहा है। पश्चिम में विकसित तकनीकें कुछ स्थानों पर उष्णकटिबंधीय फसलों को अधिक उत्पादक बनाने के लिए अपनाई जा रही हैं। प्रौद्योगिकी का कोई उपयोग नहीं, अगर वह लागू न की जाए। विकासशील विश्व में यह वर्तमान कृषि तकनीकों पर उतना ही लागू है जितना यह आनुवंशिक रूपांतरण में आई नवीनतम तरकी पर लागू है। आज की श्रेष्ठतम कृषि प्रणालियों को अफ्रीका और एशिया के कम जोत वाले और निर्वाह के लिए कृषि करने वाले कृषकों तक, ऐसे सरल मामलों में भी कि कितना और कब उर्वरक प्रयुक्त करना चाहिए, पहुँचाया जाए, तो इससे मानवता के लिए अत्यधिक खाद्यान्न-उपलब्धता हो सकेगी। इसी तरह बेहतर सड़कें और भंडारण सुविधाएँ जैसी चीजें भी बढ़ेंगी, जिससे अधिशेष खाद्यान्न की बाजारों तक दुलाई की जा सके और उनकी बर्बादी को कम किया जा सके।
21. उपर्युक्त परिच्छेद पर आधारित, निम्नलिखित पूर्वधारणाएँ बनाई गई हैं :
21. उपर्युक्त परिच्छेद पर आधारित, निम्नलिखित पूर्वधारणाएँ बनाई गई हैं :
- कृषि प्रौद्योगिकी का विकास, विकसित देशों तक सीमित है।
- कृषि प्रौद्योगिकी, विकासशील देशों में नहीं अपनाई गई है।
उपर्युक्त पूर्वधारणाओं में से कौन-सा/से वैध है/हैं?
21. उपर्युक्त परिच्छेद पर आधारित, निम्नलिखित पूर्वधारणाएँ बनाई गई हैं :
- कृषि प्रौद्योगिकी का विकास, विकसित देशों तक सीमित है।
- कृषि प्रौद्योगिकी, विकासशील देशों में नहीं अपनाई गई है।
उपर्युक्त पूर्वधारणाओं में से कौन-सा/से वैध है/हैं?