जनांकिकीय लाभांश का अवसर, जो भारत में शुरू हो चुका है और जिसके और कुछ दशकों तक चलने की संभावना है, एक बहुत बड़ा संभावना-समय है। जनांकिकीय लाभांश बुनियादी तौर पर कार्यकारी आयु जनसंख्या में स्फीति है, जिसका विलोमतः अर्थ है कि अति युवा और अति वृद्ध आयु का सापेक्ष अनुपात, कुछ समय के लिए, गिरावट पर रहेगा। आयरलैंड और चीन के अनुभव से हम जानते हैं कि यह ऊर्जा का स्रोत और आर्थिक संवृद्धि का इंजन हो सकता है। जनांकिकीय लाभांश की प्रवृत्ति किसी देश की बचत दर को बढ़ाने की होती है, क्योंकि किसी भी देश में कार्यकारी आयु जनसंख्या ही मुख्य बचतकर्ता होती है। और चूंकि बचत दर संवृद्धि का महत्वपूर्ण चालक होती है, इससे हमारी संवृद्धि दर को बढ़ाने में मदद मिलनी चाहिए। तथापि, जनांकिकीय लाभांश के लाभ कार्यकारी आयु जनसंख्या की गुणता पर निर्भर होते हैं। और इसका निहितार्थ है शिक्षा, कौशल-अर्जन और मानव पूंजी की महत्ता का स्मरण दिलाना।
इस परिच्छेद का सन्दर्भ लेते हुए निम्नलिखित में से कौन-सा/से अनुमान निकाला जा सकता है/निकाले जा सकते हैं?
- जनांकिकीय लाभांश किसी देश के लिए तेजी से इसकी आर्थिक संवृद्धि दर बढ़ाने के लिए एक अनिवार्य दशा है।
- उच्च शिक्षा की उन्नति किसी देश के लिए तेजी से इसकी आर्थिक संवृद्धि बढ़ाने के लिए एक अनिवार्य दशा है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
इस परिच्छेद का सन्दर्भ लेते हुए निम्नलिखित में से कौन-सा/से अनुमान निकाला जा सकता है/निकाले जा सकते हैं?
- जनांकिकीय लाभांश किसी देश के लिए तेजी से इसकी आर्थिक संवृद्धि दर बढ़ाने के लिए एक अनिवार्य दशा है।
- उच्च शिक्षा की उन्नति किसी देश के लिए तेजी से इसकी आर्थिक संवृद्धि बढ़ाने के लिए एक अनिवार्य दशा है।
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