अनुसंधान को प्रोत्साहित करना किसी विश्वविद्यालय के कार्यों में से एक है। समकालीन विश्वविद्यालयों ने अनुसंधान को प्रोत्साहित किया है, न केवल उन मामलों में जहाँ अनुसंधान आवश्यक है, बल्कि सभी प्रकार के पूर्ण अलाभकर विषयों में भी। वैज्ञानिक अनुसंधान संभवतः कभी भी पूरी तरह मूल्यहीन नहीं होता। यह जितना भी मूर्खतापूर्ण और महत्वहीन लगे, अनुसंधानकर्ताओं का श्रम जितना भी यांत्रिक और अबौद्धिक हो, एक ऐसा मौका हमेशा ही रहता है कि प्रतिभा के अन्वेषक के लिए उसके परिणाम महत्व के हों, जो प्रेरणाहीन किन्तु मेहनती अनुसंधानकर्ताओं द्वारा अपने लिए एकत्रित तथ्यों को किसी सारभूत सामान्यीकरण के आधार के रूप में इस्तेमाल कर सके। किन्तु, जहाँ अनुसंधान मौलिक नहीं है, और सिर्फ विद्यमान सामग्रियों को फिर से व्यवस्थित करने के रूप में बना है, जहाँ इसका उद्देश्य वैज्ञानिक न होकर साहित्यिक या ऐतिहासिक है, तो यह आशंका है कि यह पूरा कार्य निरर्थक बन कर रह जाए।
वैज्ञानिक अनुसंधान के बारे में लेखक की पूर्वधारणा यह है कि
वैज्ञानिक अनुसंधान के बारे में लेखक की पूर्वधारणा यह है कि