जैसे-जैसे मुद्रास्फीति बढ़ती है, वे सरकारें भी जो पहले बजट अनुशासन के प्रति प्रतिबद्ध थीं, परिवारों की सहायता के लिए मुक्त रूप से व्यय करती हैं। केन्द्रीय बैंकों द्वारा घोषित उच्चतर ब्याज दरों से संतुलित राजकोषीय मितव्ययिता बरतने की अपेक्षा की जाती है, क्योंकि उधार लेने के लिए अधिक भुगतान करते समय स्थिर ऋणों को बनाए रखने के लिए, सरकारों को व्यय में कटौती करनी होगी या करों में वृद्धि करनी होगी। राजकोषीय समर्थन (बैंकअप) के बिना, मौद्रिक नीति अंततः अपना प्रभाव खो देती है। उच्चतर ब्याज दरें मुद्रास्फीतिकारक हो जाती हैं, न कि मुद्राअवस्फीतिकारक, क्योंकि वे केवल सरकारों को बढ़ती ऋण-चुकौती लागतों का भुगतान करने हेतु अधिक उधार लेने के लिए प्रेरित करती हैं। मौद्रिक अनियंत्रण (मॉनिटरी अनमुर्सिंग) का जोखिम तब और अधिक होता है, जब सार्वजनिक ऋणों में वृद्धि होती है, क्योंकि ब्याज दरें बजट घाटे के लिए और अधिक महत्वपूर्ण बन जाती हैं।
निम्नलिखित में से कौन-सा/कौन-से कथन, सर्वाधिक तर्कसंगत और विवेकपूर्ण निष्कर्ष/निष्कर्षों को सर्वोत्तम रूप से दर्शाता है/दर्शाते हैं, जिसे/जिन्हें इस परिच्छेद से प्रतिपादित किया जा सकता है?
- केन्द्रीय बैंक, बजट समर्थन के बिना मुद्रास्फीति को कम नहीं कर सकते हैं।
- मौद्रिक नीति के प्रभाव सरकार द्वारा अनुसरण की जाने वाली राजकोषीय नीतियों पर निर्भर है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
निम्नलिखित में से कौन-सा/कौन-से कथन, सर्वाधिक तर्कसंगत और विवेकपूर्ण निष्कर्ष/निष्कर्षों को सर्वोत्तम रूप से दर्शाता है/दर्शाते हैं, जिसे/जिन्हें इस परिच्छेद से प्रतिपादित किया जा सकता है?
- केन्द्रीय बैंक, बजट समर्थन के बिना मुद्रास्फीति को कम नहीं कर सकते हैं।
- मौद्रिक नीति के प्रभाव सरकार द्वारा अनुसरण की जाने वाली राजकोषीय नीतियों पर निर्भर है।
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