जब कोई बच्चा किशोरावस्था पर पहुँचता है, तब माता-पिता और बच्चे के मध्य टकराव का होना संगत है, चूँकि बच्चा स्वयं को अपने मामले सुलझाने में सक्षम समझने लगता है, जबकि माता-पिता अपने अभिभावकीय व्याकुलता से भरे होते हैं, जो प्रायः अधिकार प्रेम के लिए भेष (छद्म रूप) होता है। माता-पिता सामान्यतः मानते हैं कि किशोरावस्था में उत्पन्न होने वाली विविध नैतिक समस्याएँ विशेष रूप से उनके अधिकार-क्षेत्र हैं। यद्यपि, उनके द्वारा सुझाए गए विकल्प इतने अधिक सैद्धांतिक
(डॉगमैटिक) होते हैं कि युवा शायद ही उनमें भरोसा रख पाते हैं, और वे प्रायः गोपनीय रूप से अपने खोजे हुए मार्ग पर चलते हैं।
उपर्युक्त परिच्छेद के आधार पर, निम्नलिखित पूर्वधारणाएँ बनाई गई हैं :
- किशोर अपने माता-पिता के साथ सहज अनुभव नहीं करता है, क्योंकि माता-पिता अधिकार में रखने वाले और हठधर्मी होते हैं।
- आधुनिक समय के किशोर में माता-पिता के प्रति अधिक श्रद्धा नहीं है।
उपर्युक्त पूर्वधारणाओं में से कौन-सी मान्य है/हैं?
उपर्युक्त परिच्छेद के आधार पर, निम्नलिखित पूर्वधारणाएँ बनाई गई हैं :
- किशोर अपने माता-पिता के साथ सहज अनुभव नहीं करता है, क्योंकि माता-पिता अधिकार में रखने वाले और हठधर्मी होते हैं।
- आधुनिक समय के किशोर में माता-पिता के प्रति अधिक श्रद्धा नहीं है।
उपर्युक्त पूर्वधारणाओं में से कौन-सी मान्य है/हैं?