“विज्ञान का इतिहास मानव-जाति का वास्तविक इतिहास है।” इस अद्भुत सूक्ति में उन्नीसवीं शताब्दी के लेखक ने विज्ञान को उसकी पृष्ठभूमि से जोड़ा है। अधिकतर सूक्तियों की तरह, इसकी शक्ति, विषमता के द्वारा सत्य के एक पहलू पर बल देने में निहित है, जिसे सुगमता से अनदेखा किया जा सकता है। इस मामले में विज्ञान और मानव-जाति के मध्य संबंधों को अनदेखा करना, और विज्ञान को किसी ऐसे अमूर्त अन्य पक्ष के रूप में मान लेना सहज लगता है, जिसकी कभी-कभी उसके लाभकारी प्रभावों के लिए प्रशंसा की जा सकती है, किन्तु युद्ध की विभीषिका के लिए बारम्बार और सुविधानुसार दोषारोपित किया जाता है। विज्ञान और मानव-जाति को समय-समय पर मनुष्यों की सुविधानुसार पृथक् नहीं किया जा सकता है। तथापि हमने देखा है कि, सुधार के असंख्य अवसरों के बावजूद, सभ्यता के वर्तमान काल के आरम्भिक वर्षों में अंतर्राष्ट्रीय संघर्ष हावी रहा है। क्या यह विज्ञान की प्रगति का अपरिहार्य परिणाम है या त्रुटि कहीं और है?
31. परिच्छेद के लेखक द्वारा निम्नलिखित में से किसे/किनहें प्रभावपूर्ण तरीके से संप्रेषित किया गया है?
32. उपर्युक्त परिच्छेद के आधार पर, निम्नलिखित पूर्वधारणाएँ बनाई गई हैं :
- आधुनिक जीवन की विभीषिकाएँ विज्ञान की प्रगति के अपरिहार्य परिणाम हैं।
- सत्य के जिस पहलू को अनदेखा किया जा सकता है, वह यह है कि विज्ञान वही है जिसे मनुष्य ने बनाया है।
उपर्युक्त पूर्वधारणाओं में से कौन-सी सही है/हैं?
32. उपर्युक्त परिच्छेद के आधार पर, निम्नलिखित पूर्वधारणाएँ बनाई गई हैं :
- आधुनिक जीवन की विभीषिकाएँ विज्ञान की प्रगति के अपरिहार्य परिणाम हैं।
- सत्य के जिस पहलू को अनदेखा किया जा सकता है, वह यह है कि विज्ञान वही है जिसे मनुष्य ने बनाया है।
उपर्युक्त पूर्वधारणाओं में से कौन-सी सही है/हैं?