आज, यदि हम न्यूयॉर्क, लंदन और पेरिस जैसे शहरों को विश्व के सर्वाधिक प्रतिष्ठित शहर मानते हैं, तो ऐसा इसलिए कि उनकी प्रसीमाओं में एक विशाल तंत्र उपागम (हेवी सिस्टम्स अप्रोच) वाली योजनाएँ लागू की गई थीं। इस तंत्र (सिस्टम्स) सिद्धांत का आधार सामाजिक, स्थानिक और सांस्कृतिक आकांक्षाओं को संगणन, सांख्यिकी, इष्टतमीकरण का उपयोग करके गणितीय मॉडलों में रूपांतरित करने की प्रक्रिया है तथा समस्याओं के निरूपण और समाधान करने का एक कलन-विधिक (ऐल्गोरिथ्मिक) तरीका है। पश्चिम के आरंभिक विश्वविद्यालयों ने व्यावसायिकों को आयोजना में प्रशिक्षित करना आरंभ किया था, और कुछ ऐसे अत्यंत प्रतिभावान आयोजनाकारों को जन्म दिया, जो इन क्षेत्रों में विशेषज्ञ थे। ऐसा इसलिए था, क्योंकि इन्हीं विषयों को उस आयोजना पाठ्यक्रम में समाहित कर लिया गया था, जिसकी जड़ें सामाजिक विज्ञान, भूगोल और वास्तुकला में थीं। भारत में आयोजना और इसकी शिक्षा, पश्चिम से भिन्न हैं।
उपर्युक्त परिच्छेद के आधार पर, निम्नलिखित पूर्वधारणाएँ बनाई गई हैं :
- भारत को नगर व्यावसायिकों की एक नई पीढ़ी की आवश्यकता है जिनके पास आधुनिक नगर पद्धति का संगत ज्ञान हो।
- वर्तमान में, भारतीय विश्वविद्यालयों में तंत्र उपागम (सिस्टम्स अप्रोच) में प्रशिक्षण देने की क्षमता या सामर्थ्य नहीं है।
उपर्युक्त पूर्वधारणाओं में से कौन-सी सही है/हैं?
उपर्युक्त परिच्छेद के आधार पर, निम्नलिखित पूर्वधारणाएँ बनाई गई हैं :
- भारत को नगर व्यावसायिकों की एक नई पीढ़ी की आवश्यकता है जिनके पास आधुनिक नगर पद्धति का संगत ज्ञान हो।
- वर्तमान में, भारतीय विश्वविद्यालयों में तंत्र उपागम (सिस्टम्स अप्रोच) में प्रशिक्षण देने की क्षमता या सामर्थ्य नहीं है।
उपर्युक्त पूर्वधारणाओं में से कौन-सी सही है/हैं?