परंपरागत कक्षाएँ, अधिगम प्रभाविता से अधिक नियत समयबद्धि पर बल देकर, स्वयं को परिवर्तनशील परिणामों के लिए सौंप देती हैं। कक्षा का अत्याचार यह है कि वहाँ प्रत्येक शिक्षार्थी को एक ही अवधि के लिए एक ही तरीके से व्याख्यानों के एक ही सेट के अधीन किया जाता है। अंत में, कुछ शिक्षार्थी आगे निकल जाते हैं, कुछ अपना अस्तित्व बनाए रखते हैं और शेष पीछे छूट जाते हैं। इस नियत समयबद्धि के बाद, कक्षा का यह मॉडल चलता रहता है, और जो पीछे छूट गए हैं, उनके लिए एक बार भी नहीं सोचा जाता। इस तरह डेढ़ दशक की औपचारिक शिक्षा के बाद हम अपने स्नातकों में 10 प्रतिशत रोजगार-योग्यता ला पाते हैं। कौशल शिक्षा के क्षेत्र में यही अप्रभावी कहानी दोहराने से अलग परिणाम नहीं मिलेंगे।
41. निम्नलिखित में से कौन-सा/कौन-से कथन, सर्वाधिक तर्कसंगत और विवेकपूर्ण निष्कर्ष/निष्कर्षों को सर्वोत्तम रूप से दर्शाता है/दर्शाते हैं, जिसे/जिन्हें इस परिच्छेद से प्रतिपादित किया जा सकता है?
42. उपर्युक्त परिच्छेद के आधार पर, निम्नलिखित पूर्वधारणाएँ बनाई गई हैं :
- चूँकि हमारे देश में बहुत बड़ी संख्या में श्रमिक असंगठित क्षेत्रों में नियोजित हैं, इसलिए भारत को शिक्षा की अपनी वर्तमान पारंपरिक कक्षा प्रणाली को बदलने की आवश्यकता नहीं है।
- शिक्षा की अपनी वर्तमान पारंपरिक कक्षा प्रणाली के साथ भी, भारत जनसांख्यिकीय लाभांश के हितलाभ को पूर्णतः प्राप्त करते हुए पर्याप्त संख्या में कुशल श्रमिक उत्पन्न कर रहा है।
उपर्युक्त पूर्वधारणाओं में से कौन-सी मान्य है/हैं?
42. उपर्युक्त परिच्छेद के आधार पर, निम्नलिखित पूर्वधारणाएँ बनाई गई हैं :
- चूँकि हमारे देश में बहुत बड़ी संख्या में श्रमिक असंगठित क्षेत्रों में नियोजित हैं, इसलिए भारत को शिक्षा की अपनी वर्तमान पारंपरिक कक्षा प्रणाली को बदलने की आवश्यकता नहीं है।
- शिक्षा की अपनी वर्तमान पारंपरिक कक्षा प्रणाली के साथ भी, भारत जनसांख्यिकीय लाभांश के हितलाभ को पूर्णतः प्राप्त करते हुए पर्याप्त संख्या में कुशल श्रमिक उत्पन्न कर रहा है।
उपर्युक्त पूर्वधारणाओं में से कौन-सी मान्य है/हैं?