सरकार के लिए राज्य के स्वामित्व वाली कम्पनियों को प्रायः सहमति और अनदेखी से नियंत्रित करना आसान है । इसलिए पहले कदम के रूप में वास्तव में यह करने की जरूरत है कि पेट्रोल के कीमत-निर्धारण को एक पारदर्शी सूत्र पर आधारित किया जाए — यदि कच्चे तेल की कीमत और विनिमय दर हो, तब हर महीने अथवा पखवाड़े पर, सरकार पेट्रोल की अधिकतम कीमत की घोषणा करे, तो उसे कोई भी व्यक्ति और के आधार पर परिकलित कर सकता है । यह सुनिश्चित करने हेतु नियम बनाया जाना चाहिए कि तेल का विपणन करने वाली कम्पनियाँ सामान्य रूप से, अपनी लागतें प्राप्त कर सकें । इसका तात्पर्य यह है कि यदि कोई कम्पनी नवप्रवर्तनों से अपनी लागतों को कम कर ले, तो
वह और अधिक लाभ प्राप्त करेगी। इस प्रकार, इस प्रणाली के अंतर्गत व्यावसायिक प्रतिष्ठान नवप्रवर्तनों की ओर अधिक प्रवृत्त और दक्ष हो जाएँगे। एक बार नियम की घोषणा हो जाए, तो सरकार की तरफ से फिर कोई हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। यदि कुछ समय के लिए ऐसा कर दिया जाए, तो प्राइवेट कम्पनियाँ इस बाज़ार में पुनः प्रवेश करेंगी। और जब एक बार उनकी पर्याप्त संख्या बाज़ार में आ जाए, तो हम नियम-आधारित कीमत-निर्धारण को हटा सकते हैं और इसे वास्तविक रूप में बाज़ार पर छोड़ा जा सकता है (निश्चित रूप से सामान्य ऐंटी-ट्रस्ट (न्यास-विरोधी) विनियमों व अन्य प्रतिस्पर्धी कानूनों के अधीन रहते हुए)।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
परिच्छेद के अनुसार, कोई तेल कम्पनी और अधिक लाभ कमा सकती है, यदि पेट्रोल के कीमत-निर्धारण हेतु एक पारदर्शी सूत्र प्रति पखवाड़े या माह घोषित किया जाए,
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
परिच्छेद के अनुसार, कोई तेल कम्पनी और अधिक लाभ कमा सकती है, यदि पेट्रोल के कीमत-निर्धारण हेतु एक पारदर्शी सूत्र प्रति पखवाड़े या माह घोषित किया जाए,