"कीमत वही चीज़ नहीं है जो मूल्य है। मान लें कि किसी दिन हर चीज़ जैसे, कोयला, रोटी, डाक टिकटें, एक दिन का श्रम, मकानों का भाड़ा, आदि की कीमतें दुगुनी हो जाती हैं। तब कीमतें निश्चित रूप से बढ़ेंगी, किन्तु एक को छोड़कर बाकी चीज़ों के मूल्य नहीं बढ़ेंगे।"
लेखक कहना चाहता है कि यदि सभी चीज़ों की कीमतें दुगुनी हो जाएँ तो
"कीमत वही चीज़ नहीं है जो मूल्य है। मान लें कि किसी दिन हर चीज़ जैसे, कोयला, रोटी, डाक टिकटें, एक दिन का श्रम, मकानों का भाड़ा, आदि की कीमतें दुगुनी हो जाती हैं। तब कीमतें निश्चित रूप से बढ़ेंगी, किन्तु एक को छोड़कर बाकी चीज़ों के मूल्य नहीं बढ़ेंगे।"
लेखक कहना चाहता है कि यदि सभी चीज़ों की कीमतें दुगुनी हो जाएँ तो