checking user
checking user
checking user
checking user
Q. 56
DiscussAttempt

केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों के निवल लाभ उनकी कुल परिसम्पत्तियों का मात्र 2.2% है, जो प्राइवेट निगम क्षेत्रक की तुलना में कम है। भले ही सार्वजनिक क्षेत्रक या राज्य-संचालित उद्यमवृत्ति ने भारत के औद्योगीकरण को प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, तथापि, हमारी बढ़ती हुई विकास आवश्यकताएँ, सार्वजनिक क्षेत्रक उद्यमों के संतोषजनक से अपेक्षाकृत न्यून निष्पादन, हमारे प्राइवेट क्षेत्रक में आई परिपक्वता, उद्यमवृत्ति के प्रसार हेतु इस समय उपलब्ध कहीं अधिक व्यापक सामाजिक आधार और प्रतियोगिता नीतियों को लागू कर सकने के बढ़ते हुए सांस्थानिक सामर्थ्य यह सुझाते हैं कि सार्वजनिक क्षेत्रक की भूमिका के पुनरवलोकन का समय आ गया है।

सरकार का संविभाग-संघटन कैसा होना चाहिए ? इसे सारे समय स्थिर नहीं बने रहना चाहिए। विमानन उद्योग पूर्णतः प्राइवेट मामलों की तरह भली-भाँति कार्य करता है। दूसरी तरफ, ग्रामीण सड़कों को, जिनका छुटपुट यातायात पथकर व्यवस्था को अव्यवहार्य बना देता है, राज्य के तुलन-पत्र पर होना चाहिए। यदि ग्रामीण सड़कें सरकार के स्वामित्व में न हों, तो उनका अस्तित्व ही न रहेगा। उसी तरह, हमारे क़सबों और नगरों में लोक स्वास्थ्य पूँजी का सार्वजनिक क्षेत्रक से आना ज़रूरी है। इसी प्रकार, वनाच्छादन के संरक्षण और संवर्धन को सार्वजनिक क्षेत्रक परिसम्पत्तियों की एक नई प्राथमिकता के रूप में होना चाहिए।

इस्पात का ही उदाहरण लें। लगभग शून्य प्रशुल्क के साथ, भारत इस धातु के लिए एक सार्वभौम प्रतियोगी बाज़ार है। भारतीय व्यापार-प्रतिष्ठान विश्व बाज़ार में इस्पात का निर्यात करते हैं, जिससे यह निर्दर्शित होता है कि प्रौद्योगिकी में कोई अंतराल नहीं है। भारतीय कम्पनियाँ विश्व की इस्पात कम्पनियों को खरीद रही हैं, जो यह दिखाता है कि पूँजी उपलब्धता में कोई अंतराल नहीं है। इन दशाओं में, प्राइवेट स्वामित्व उत्कृष्ट कार्य करता है।

विनियमित उद्योगों में, वित्त से लेकर आधारिक संरचना तक, प्राइवेट स्वामित्व साफ़ तौर पर वांछनीय है, जहाँ सरकारी अधिकरण विनियमन का कार्य निष्पन्न करे और बहुल प्रतियोगी व्यापार-प्रतिष्ठान प्राइवेट क्षेत्रक में अवस्थित हों। यहाँ, सरल और स्पष्ट समाधान है — सरकार का खेलपंच (अम्पायर) की तरह होना और प्राइवेट क्षेत्रक का खिलाड़ियों की तरह होना ही सबसे अच्छी तरह कार्य करता है। इनमें से अनेक उद्योगों में, सरकारी स्वामित्व की विरासत है, जहाँ उत्पादकता की प्रवृत्ति अपेक्षाकृत कम रहने की ओर है, दिवालियेपन का भय मौजूद नहीं है, और करदाताओं से धन की माँग का जोखिम हमेशा बना हुआ है। इसमें, सरकार के स्वामी होने और नियामक होने के बीच एक हित-द्रन्द भी बना रहता है। यदि सरकारी कम्पनियाँ कार्यरत न हों, तो प्रतियोगिता नीति की रचना और कार्यान्वयन और भी सशक्त और निष्पक्ष होगा।

इस परिच्छेद के अनुसार, ग्रामीण सड़कों को सार्वजनिक क्षेत्रक के दायरे में ही होना चाहिए । क्यों ?

A

ग्रामीण विकास-कार्य केवल सरकार का अधिकार-क्षेत्र है ।

B

इसमें निजी क्षेत्रक को धन लाभ नहीं हो सकता ।

C

सरकार कर-दाताओं से धन लेती है, अतः यह सरकार का ही दायित्व है ।

D

प्राइवेट क्षेत्रक की कोई सामाजिक जिम्मेदारी होना आवश्यक नहीं है ।

Kepler. Discussing PYQs. Q.no. 56