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Q. 12
DiscussAttempt

कृषि पारिस्थितिकी के मूल में यह अवधारणा है कि कृषि पारिस्थितिक तंत्रों को प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्रों के जैव-विविधता स्तलों और कार्य-प्रणाली का अनुकरण करना चाहिए। ऐसी कृषि अनुकृतियाँ (मिमिक्स), अपने प्राकृतिक माँडलों की तरह उत्पादक, पीड़क-प्रतिरोधी, पोषक-संरक्षक, तथा प्रधात और तनाव के प्रति समुत्थानशील (रिजिलिएंट) हो सकती हैं। पारिस्थितिक तंत्रों में कुछ भी 'व्यर्थ' नहीं जाता है, और पोषक तत्वों का अनंत काल तक पुनः चक्रण होता है। कृषि पारिस्थितिकी का उद्देश्य पोषक तत्वों को बंद करना है, अर्थात्, मिट्टी से निकल चुके सभी पोषक तत्वों को फार्मयार्ड खाद के अनुप्रयोग जैसे तरीकों के द्वारा मिट्टी में पुनः वापस पहुँचाना है। इसके अंतर्गत, प्राकृतिक प्रक्रियाओं का उपयोग पीड़क नियंत्रण के लिए तथा अंतर-सस्य कृषि (इंटर-क्रॉपिंग) के द्वारा मृदा को उर्वर बनाने के लिए भी किया जाता है। कृषि पारिस्थितिकी पद्धतियों में पशुधन और फसलों के साथ वृक्षों का एकीकरण शामिल है।

निम्नलिखित पर विचार कीजिए :

  1. भूमि-संरक्षण-सस्य (कवर क्रॉप्स)
  2. उर्वरक-सिंचाई (फर्टिगेशन)
  3. जल संवर्धन
  4. मिश्रित कृषि
  5. बहु-सस्यन (पॉलीकल्चर)
  6. ऊर्ध्वाधर कृषि (वर्टिकल फार्मिंग)

परिच्छेद के अनुसार, उपर्युक्त में से कौन-सी कृषि पद्धतियाँ कृषि पारिस्थितिकी के अनुकूल हो सकती हैं ?

A

केवल 1, 4 और 5

B

केवल 2, 3, 4 और 5

C

केवल 1, 2, 3 और 6

D

केवल 4 और 6

Kepler. Discussing PYQs. Q.no. 12