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Q. 62
DiscussAttempt

हमारे विद्यालयों में, हम अपने बच्चों को भौतिकी, गणित और इतिहास तथा हमारे पास जो कुछ ज्ञान है, उनके बारे में सब कुछ पढ़ाते हैं जिन्हें जानने की आवश्यकता है। किंतु क्या हम उन्हें देश में महामारी की तरह फैले जातिभेद की कड़वाहट के बारे में, हमारी भूमि के बहुत बड़े हिस्से को ग्रसित करने वाले सूखे के दुष्परिणामों के बारे में, महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता (जेंडर सेंसिटिविटी) के बारे में, विकल्प के रूप में निरीश्वरवाद की संभावना, आदि के बारे में शिक्षा देते हैं ? यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि क्या हम उन्हें प्रश्न पूछने की शिक्षा देते हैं, अथवा उन्हें केवल निष्क्रिय रहकर हमारे प्रज्ञान ग्रहण करने की शिक्षा देते हैं ? विद्यालय की संवृत (कोकूनड) दुनिया से निकलकर, अचानक ही, किशोर/किशोरी स्वयं को विश्वविद्यालय की उन्मुक्त दुनिया में पाता/पाती है। यहाँ वह विचारों, प्रभावों और विचारधाराओं के दृढ़ में बह जाता/जाती है। यह संक्रमण उसके लिए कष्टदायी हो सकता है, जिसे प्रश्न पूछने और राय कायम करने के लिए हतोत्साहित किया गया है।

निम्नलिखित में से कौन-सा कथन उपर्युक्त परिच्छेद के केंद्रीय विचार को सर्वोत्तम रूप से दर्शाता है ?

A

विद्यालयी पाठ्यक्रम बच्चों और अभिभावकों की अपेक्षाओं के अनुकूल नहीं है।

B

शैक्षिक उपलब्धियों पर बल देने से व्यक्तित्व और कौशल के विकास के लिए समय मिलता है।

C

बच्चों को बेहतर नागरिक बनने के लिए तैयार करना, शिक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी होनी चाहिए।

D

बेहतर नागरिक बनने के लिए, वर्तमान विश्व व्यवस्था शैक्षिक विषय-वस्तु के अतिरिक्त, सामाजिक और जीवन-साधक कौशल की माँग भी करती है।

Kepler. Discussing PYQs. Q.no. 62