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Q. 52
DiscussAttempt

हमारे नगर, जनसंख्या के अधिक संकेन्द्रण और अपर्याप्त आधारिक संरचनाओं के कारण जलवायु परिवर्तन के प्रति अत्यधिक सुभेद्य हैं। इसके अतिरिक्त, उनमें जनसंख्या घनत्व बढ़ रहा है, किंतु हमने जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के निराकरण के लिए अभी तक कोई प्रणाली विकसित नहीं की है। जी.डी.पी. में, हमारे नगरों का योगदान 65% है, किंतु उनमें जनता की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त सुविधाएँ नहीं हैं। वायु की गुणता, परिवहन, आदि, से संबंधित समस्याओं पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है, जो कि संधारणीय समाधान ढूँढ़ने के लिए अत्यावश्यक हैं। हमें नगर योजना बनाने के कार्य में नागरिकों को सम्मिलित करने की आवश्यकता है और ऐसे पारिस्थितिक तंत्र का सृजन करना होगा जो लोगों की आवश्यकताओं को पूरा कर सके।

उपर्युक्त परिच्छेद के आधार पर प्रतिपादित, निम्नलिखित में से कौन-सा सर्वाधिक तर्कसंगत और विवेकपूर्ण निष्कर्ष हो सकता है ?

A

हमारे नगरों में पर्याप्त स्वायत्तता के साथ सुस्पष्ट प्रशासनिक व्यवस्था का होना आवश्यक है।

B

निरंतर बढ़ता हुआ जनसंख्या घनत्व, संधारणीय विकास करने के हमारे प्रयासों में बाधक है।

C

हमारे नगरों के रख-रखाव और विकास के लिए हमें संधारणीयता संबंधी हस्तक्षेप करने की आवश्यकता है।

D

भारत की आधारिक संरचना और संधारणीयता संबंधी समस्याओं के लिए विकास की सार्वजनिक-निजी भागीदारी पद्धति व्यवहार्य दीर्घावधि समाधान है।

Kepler. Discussing PYQs. Q.no. 52