अभिजातीय शासन स्वयं को उस दायरे में अत्यधिक रूप से सीमाबद्ध करके विनष्ट कर लेता है, जिस दायरे में सत्ता सीमित होती है; अल्पतंत्रीय शासन तात्कालिक धन प्राप्ति के लिए असावधानीपूर्वक संघर्ष कर स्वयं को विनष्ट करता है। यहाँ तक कि, लोकतंत्र के अतिरेक से लोकतंत्र भी स्वयं को विनष्ट करता है। इसका मूलभूत सिद्धांत यह है कि पद धारण करने और लोक नीति निर्धारण करने का सबको समान अधिकार है। प्रथम दृष्टि में, यह एक सुखद व्यवस्था है; किंतु यह विनाशकारी बन जाता है, क्योंकि लोग समुचित रूप से शिक्षित नहीं होते हैं कि वे उत्तम शासकों और सर्वाधिक विवेकपूर्ण मार्ग का चयन कर सकें। लोगों में समझ नहीं होती है और वे केवल वही दोहराते हैं जो उनके शासक उन्हें कहना पसंद करते हैं। ऐसा लोकतंत्र, निरंकुश शासन या स्वेच्छाचारी शासन होता है। — प्लेटो
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन उपर्युक्त परिच्छेद के मर्म को सर्वोत्तम रूप से दर्शाता है ?
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन उपर्युक्त परिच्छेद के मर्म को सर्वोत्तम रूप से दर्शाता है ?