विश्व की बाल मृत्यु में लगभग पाँचवाँ भाग भारत का है। संख्या के आधार पर, यह दुनिया में सर्वाधिक बाल मृत्यु है — लगभग 16 लाख प्रति वर्ष। इनमें से, आधे से अधिक की जीवन के प्रथम मास में ही मृत्यु हो जाती है। जैसा कि अधिकारियों का विश्वास है, इसका कारण यह है कि स्तनपान और प्रतिरक्षीकरण (इम्प्यूनाइजेशन) से संबंधित आधारभूत स्वास्थ्य आचरणों के प्रसार के लिए कदम नहीं उठाए गए हैं। साथ ही, 2.6 करोड़ की विशाल गर्भधारण-योग्य जनसंख्या गर्भावस्था तथा प्रसव-पश्चात् के संकटपूर्ण समय के दौरान देखभाल से वंचित भी बनी रहती है। इसमें बाल विवाहों का प्रचलन, युवतियों में अरक्तता (अनीमिया) तथा किशोरावस्था की स्वच्छता पर विशेष ध्यान न होना भी शामिल है, जो सभी बाल मृत्यु दरों को प्रभावित करते हैं।
उपर्युक्त परिच्छेद से, कौन-सा निर्णायक अनुमान (इनफरेंस) निकाला जा सकता है ?
उपर्युक्त परिच्छेद से, कौन-सा निर्णायक अनुमान (इनफरेंस) निकाला जा सकता है ?