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Q. 43
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खुले में मलत्याग अनर्थकारी हो सकता है, जब यह अति सघन आबादी वाले क्षेत्रों में व्यवहार में लाया जा रहा हो, जहाँ मानव मल को फ़सलों, कुओं, खाद्य सामग्रियों और बच्चों के हाथों से दूर रखना असंभव होता है। भीम जल (ग्राउन्डवाटर) भी खुले में किए गए मलत्याग से संदूषित हो जाता है। आहार में गए अनेक रोगाणु और कृमियाँ बीमारियाँ फैलाते हैं। वे शरीर को कैलोरियों और पोषक-तत्वों का अवशोषण करने लायक नहीं रहने देते। भारत के लगभग आधे बच्चे कुपोषित बने रहते हैं। उनमें से लाखों, उन रोग-दशाओं से मर जाते हैं जिनसे बचाव सम्भव था। अतिसार (डायरिया) के कारण भारतीयों के शरीर औसत रूप से उन लोगों से छोटे हैं जो अपेक्षाकृत गरीब देशों के हैं, जहाँ लोग खाने में अपेक्षाकृत कम कैलोरियाँ लेते हैं। न्यून-भार (अंडरवेट) मातार्ण्ड ऐसे अविकसित (स्टेटेड) बच्चे पैदा करती हैं जो आसानी से बीमारी का शिकार हो सकते हैं और अपनी पूरी संज्ञानात्मक संभावनाओं (कोग्निटिव पोटेंशियल) को विकसित करने में असफल रह सकते हैं। जो रोगाणु पर्यावरण में निर्मुक्त हो जाते हैं वे न केवल अमीर और गरीब, बल्कि शौचालयों का प्रयोग करने वालों को भी, एकसमान हानि पहुँचाते हैं।

उपर्युक्त परिच्छेद से निम्नलिखित में से कौन-सा, सबसे निर्णायक अनुमान (इंफरेंस) निकाला जा सकता है ?

A

भारत की केंद्रीय और राज्य सरकारों के पास इतने पर्याप्त संसाधन नहीं हैं कि प्रत्येक घर के लिए एक शौचालय सुलभ करा सकें।

B

खुले में मलत्याग भारत की सर्वाधिक महत्वपूर्ण लोक स्वास्थ्य समस्या है।

C

खुले में मलत्याग, भारत के कार्यबल (वर्क-फोर्स) की मानव-पूँजी (ह्यूमन कैपिटल) में हास लाता है।

D

खुले में मलत्याग सभी विकासशील देशों की लोक स्वास्थ्य समस्या है।

Kepler. Discussing PYQs. Q.no. 43