कोई भी अधिकार परम, अनन्य और अनुल्लंघनीय नहीं है । इसी तरह, व्यक्तिगत सम्पत्ति के अधिकार को उसकी कल्पित वैधता के बृहत्तर सन्दर्भ में देखा जाना चाहिए । व्यक्तिगत सम्पत्ति के अधिकार में, स्वतंत्रता के सिद्धान्त का समता के सिद्धान्त के साथ, और इन दोनों का सहयोग के सिद्धान्त के साथ समन्वय होना चाहिए ।
62. उपर्युक्त परिच्छेद में दिए गए तर्क के आलोक में, निम्नलिखित में से कौन-सा एक कथन सबसे अधिक विश्वासप्रद स्पष्टीकरण है ?
- (a) व्यक्तिगत सम्पत्ति का अधिकार, संविधियों और धर्मग्रन्थों द्वारा विधिवत समर्थित, एक नैसर्गिक अधिकार है ।
- (b) व्यक्तिगत सम्पत्ति एक चोरी है तथा शोषण का उपकरण है । अतः व्यक्तिगत सम्पत्ति का अधिकार आर्थिक न्याय का उल्लंघन है ।
- (c) व्यक्तिगत सम्पत्ति का अधिकार वितरक न्याय का उल्लंघन है तथा सहयोग के सिद्धान्त को नकारता है ।
- (d) आर्थिक न्याय का व्यापक विचार इस बात की माँग करता है कि प्रत्येक व्यक्ति के सम्पत्ति अर्जन के अधिकार को, दूसरों के सम्पत्ति अर्जन के अधिकार के साथ सामंजस्यपूर्ण होना चाहिए ।
62. उपर्युक्त परिच्छेद में दिए गए तर्क के आलोक में, निम्नलिखित में से कौन-सा एक कथन सबसे अधिक विश्वासप्रद स्पष्टीकरण है ?
62. उपर्युक्त परिच्छेद में दिए गए तर्क के आलोक में, निम्नलिखित में से कौन-सा एक कथन सबसे अधिक विश्वासप्रद स्पष्टीकरण है ?