मानव एवं राज्य के मध्य संघर्ष उतना ही पुराना है जितना कि राज्य का इतिहास । यद्यपि सदियों से राज्य एवं व्यक्ति के प्रतिस्पर्धी दावों के बीच तालमेल बनाने के प्रयास हुए हैं, किन्तु समाधान अभी भी दूर प्रतीत होता है । यह मुख्यतः इसलिए है क्योंकि मानव समाज की प्रकृति गतिशील है जिसमें पुराने मूल्यों और विचारों ने निरन्तर नए मूल्यों और विचारों को स्थान दिया है । यह स्पष्ट है कि यदि व्यक्तियों को बोलने और कार्य करने की निरपेक्ष स्वतन्त्रता दे दी गई, तो उसका परिणाम अव्यवस्था, विनाश एवं अराजकता में हो सकता है ।
63. निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा एक, लेखक के दृष्टिकोण का सर्वोत्तम सारांश प्रस्तुत करता है ?
- (a) राज्य और व्यक्ति के दावों के बीच संघर्ष अनसुलझा बना रहता है ।
- (b) अराजकता और अव्यवस्था लोकतांत्रिक परम्पराओं के स्वाभाविक परिणाम हैं ।
- (c) मानव समाज की गतिशील प्रकृति के बावजूद प्राचीन मूल्य, विचार और परम्पराएँ बनी रहती हैं ।
- (d) वाक् स्वातंत्र्य (फ्रीडम ऑफ स्पीच) की संवैधानिक गारंटी समाज के हित में नहीं है ।
63. निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा एक, लेखक के दृष्टिकोण का सर्वोत्तम सारांश प्रस्तुत करता है ?
63. निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा एक, लेखक के दृष्टिकोण का सर्वोत्तम सारांश प्रस्तुत करता है ?