मानव विकास को संवर्धित करने वाले व्यक्ति, समूह और नेता कड़ी संस्थागत, संरचनात्मक और राजनीतिक बाध्यताओं के अंतर्गत कार्य करते हैं जिनसे नीति के विकल्प प्रभावित होते हैं। किंतु अनुभव यह सुझाव देता है कि मानव विकास हेतु एक उपयुक्त कार्यसूची को आकार देने के लिए व्यापक सिद्धांतों की आवश्यकता होती है। अनेक दशकों के मानव विकास के अनुभव से इस एक महत्वपूर्ण बात का पता लगा है कि आर्थिक संवृद्धि पर ही अनन्य रूप से ध्यान केंद्रित करने से समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। हमारे पास स्वास्थ्य और शिक्षा को उन्नत करने के तरीकों की अच्छी जानकारी तो है, लेकिन संवृद्धि किन कारणों से होती है इसे समझने में काफी कमी है और संवृद्धि प्रायः भ्रामक है। साथ ही, संवृद्धि पर असंतुलित रूप से बल देने से प्रायः पर्यावरण पर नकारात्मक परिणाम और वितरण में प्रतिकूल प्रभाव होते हैं। संवृद्धि के प्रभावशाली कीर्तिमान वाला चीन का अनुभव, इन व्यापक सरोकारों को प्रतिबिंबित करता है और मानव विकास के गैर-आय पहलुओं में निवेश को प्रमुखता देने वाले संतुलित दृष्टिकोणों के साथ आगे बढ़ने के महत्त्व पर बल देता है।
उपर्युक्त परिच्छेद के सन्दर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
- विकासशील देशों में, मानव विकास और नीति विकल्पों के लिए मजबूत संस्थागत संरचना ही एकमात्र आवश्यकता है।
- मानव विकास और आर्थिक संवृद्धि सदैव सकारात्मक रूप से परस्पर संबंधित नहीं हैं।
- केवल मानव विकास पर ही बल देना, आर्थिक संवृद्धि का लक्ष्य होना चाहिए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं ?
उपर्युक्त परिच्छेद के सन्दर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
- विकासशील देशों में, मानव विकास और नीति विकल्पों के लिए मजबूत संस्थागत संरचना ही एकमात्र आवश्यकता है।
- मानव विकास और आर्थिक संवृद्धि सदैव सकारात्मक रूप से परस्पर संबंधित नहीं हैं।
- केवल मानव विकास पर ही बल देना, आर्थिक संवृद्धि का लक्ष्य होना चाहिए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं ?