‘स्टैंच ऑफ केरोसीन’, ग्रामीण पृष्ठभूमि में सजाई गई, अनेक वर्षों से विवाहित किंतु निःसंतान दम्पति गुलेरी और मानक की कहानी है । मानक की माँ खानदान के नाम को आगे जारी रखने हेतु एक पोता पाने के लिए तड़प रही है । अतः वह गुलेरी की गैर-मौजूदगी में मानक का पुनर्विवाह करा देती है । मानक को, जो अनिच्छुक और निष्क्रिय दर्शक सा बना रहता है, इस बीच उसका एक मित्र सूचित करता है कि गुलेरी ने पति के दूसरे विवाह की बात सुनकर अपने कपड़ों पर केरोसीन डाल कर आग लगा ली थी । इससे मानक का दिल टूट जाता है और वह एक मुर्दा इन्सान की तरह जीवन व्यतीत करने लगता है । जब उसकी दूसरी पत्नी एक पुत्र को जन्म देती है, तो मानक बच्चे को बहुत देर तक घूरता रहता है और फिर फूट पड़ता है, “इसे यहाँ से दूर करो ! इससे केरोसीन की दुर्गंध आती है ।”
यह संवेदनशील समस्या-आधारित कहानी पाठकों को किसके बारे में जागरूक करने का प्रयास करती है ?
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