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Q. 43
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पर्यावरण-विषयक शब्दावली में धारणीय जीवन-शैलियों और साथ-साथ जलवायु न्याय को महत्वपूर्ण सिद्धांतों के रूप में माना जाता है। ये दोनों सिद्धांत राष्ट्र के राजनीतिक और आर्थिक विकल्पों को प्रभावित करते हैं। अभी तक, हमारी जलवायु परिवर्तन शिखर-वार्ताओं और करारों में ये दोनों सिद्धांत राष्ट्रों के बीच सर्वसम्मति नहीं बना पाए हैं। न्याय, न्यायिक अर्थ में तो सुपरिभाषित है। तथापि, जलवायु परिवर्तन के सन्दर्भ में, इसके वैज्ञानिक और साथ ही सामाजिक-राजनीतिक अभिप्राय हैं। अगले कुछ-एक वर्षों में यह निर्णायक प्रश्न खड़ा होगा कि जलवायु परिवर्तन से उत्पीड़ित व्यक्तियों को अवलंब देने के लिए संसाधन, प्रौद्योगिकियाँ और विनियम किस प्रकार उपयोग में लाए जाएंगे। जलवायु के विषय में न्याय, दुष्प्रभावों को कम करने की कार्रवाइयों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जलवायु परिवर्तन के अनुरूप अनुकूलन के लिए अवलंब और हानियों और नुकसानों के लिए क्षतिपूर्ति, की कहीं अधिक व्यापक धारणा शामिल है।

निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा एक, इस परिच्छेद द्वारा व्यक्त सर्वाधिक युक्तियुक्त, तर्कसंगत और निर्णायक संदेश को सर्वोत्तम रूप में प्रतिबिंबित करता है ?

A

जलवायु न्याय सभी नई जलवायु करारों/समझौतों के नियमों में विस्तार से बसा हुआ होना चाहिए।

B

पर्यावरणीय संसाधन पूरे विश्व में असमान रूप से वितरित हैं और उनका दोहन हुआ है।

C

बृहद् संख्या में जलवायु परिवर्तन के शिकार लोगों/जलवायु शरणार्थियों की समस्याओं का निपटारा करने का एक आसन्न मुद्दा सामने है।

D

जलवायु परिवर्तन, सभी अभिप्रायों में, अधिकतर विकसित देशों के कारण हुए हैं, इसलिए इसके भार-वहन का उनका अंश अपेक्षाकृत अधिक होना चाहिए।

Kepler. Discussing PYQs. Q.no. 43