कृषि भूमियों के साथ-साथ गैर-कृषि भूमियों (वनों, आर्द्र भूमियों, चरागाहों, आदि जैसी कृषीतर पद्धतियों) को खाद्य का स्रोत बनाना खाद्य उपभोग के प्रति एक तंत्रानुसारी उपागम को सुकर बनाता है। यह ग्रामीण और जनजातीय समुदायों को पूरे वर्ष निर्वाह करने और नैसर्गिक आपदाओं तथा मौसम के कारण होने वाली कृषिजन्य खाद्य की कमियों से बचे रहने में सहायक होता है। चूंकि, वार्षिक फसलों की अपेक्षा, प्रतिकूल मौसम दशाओं में वृक्षों में पनपने की प्रायः अधिक क्षमता होती है, फसल न होने के कारण हुए खाद्य के अभाव की अवधियों में वन-आधारित खाद्य प्रायः एक सुरक्षा जाल प्रदान करते हैं; वन-आधारित खाद्य मौसमी फसल उत्पादन अंतरालों के बीच भी महत्वपूर्ण योगदान करते हैं।
निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा एक, इस परिच्छेद के लेखक द्वारा दिए गए सर्वाधिक युक्तियुक्त और तर्कसंगत सन्देह को सर्वोत्तम रूप में प्रतिबिंबित करता है ?
निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा एक, इस परिच्छेद के लेखक द्वारा दिए गए सर्वाधिक युक्तियुक्त और तर्कसंगत सन्देह को सर्वोत्तम रूप में प्रतिबिंबित करता है ?