विकल्प के विरोधाभास को बूरिदां की गधे की कहानी के द्वारा समझाया गया है। 14वीं शताब्दी के दार्शनिक ज्यां बूरिदां (Jean Buridan) ने स्वतंत्र इच्छा-शक्ति और अनेकों विकल्पों और अनिश्चितताओं के कारण चयन करने की असमर्थता के बारे में लिखा है। इस कहानी में, एक गधा भूसे के दो समान रूप से आकर्षक ढेरियों के बीच खड़ा है। वह कौन-सी ढेरी को खाए, यह निर्णय करने में असमर्थ हो कर वह भूखा ही मर जाता है। प्रौद्योगिकी और नवप्रवर्तन, जैसे कि स्मार्ट फोन और टैबलेट, में आने वाले बदलाव हमारे विकल्पों की बहुतायत को केवल तीव्र ही करते हैं। सतत कनेक्टिविटी और सद्यः अनुक्रिया दत्त का अति-उपभोग तथा सोशल मीडिया, आत्म-चिंतन और विश्राम के लिए कोई जगह ही नहीं छोड़ते, जिससे निर्णयन और अधिक कठिन हो जाता है। जीवन का रूप विकल्पमय है। अनेक लोगों के पास जीवन के आकर्षक विकल्पों की बहुतायत है, फिर भी वे खुद को दुखी और चिंताग्रस्त पाते हैं।
निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा एक, उपर्युक्त परिच्छेद में निहित सर्वाधिक तर्कसंगत सन्देश को सर्वोत्तम रूप से प्रतिबिंबित करता है ?
निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा एक, उपर्युक्त परिच्छेद में निहित सर्वाधिक तर्कसंगत सन्देश को सर्वोत्तम रूप से प्रतिबिंबित करता है ?