भारत में घरेलू वित्त बेजोड़ है। हमारी प्रवृत्ति स्वर्ण और संपदा जैसी भौतिक परिसंपत्तियों में भारी निवेश करने की है। बचत के वित्तीयकरण को बढ़ावा देने के कदम सोचनीय हैं। परंपरागत तौर-तरीकों का अभ्यस्त जनसाधारण, आसानी से वित्तीयकरण में नहीं कूद पड़ेगा। बदलाव के सामने जो रुकावटें हैं, वे हैं दुर्बल नौकरशाही, संगठित वित्तीय संस्थाओं के प्रति संशय, इस बारे में आधारभूत सूचना का अभाव कि हर परिवार के लिए असंख्य सेवाओं और सेवा-प्रदाताओं में से कौन-सी सबसे अच्छी है, और यदि आवश्यक हो, तो उनमें पारगमन कर सकते हैं या नहीं, और (कर सकते हैं तो) कैसे कर सकते हैं।
घरेलू बचतों के वित्तीयकरण के संबंध में, निम्नलिखित कथनों में से कौन-कौन से, इस परिच्छेद में निहित हलों को सर्वोत्तम रूप से प्रतिबिंबित करते हैं ?
- हलों को विकसित करने के लिए एक लचीला वातावरण आवश्यक है।
- परिवारों के अनुसार बने हुए हलों की आवश्यकता है।
- वित्तीय प्रौद्योगिकी में नवप्रवर्तन आवश्यक हैं।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
घरेलू बचतों के वित्तीयकरण के संबंध में, निम्नलिखित कथनों में से कौन-कौन से, इस परिच्छेद में निहित हलों को सर्वोत्तम रूप से प्रतिबिंबित करते हैं ?
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- परिवारों के अनुसार बने हुए हलों की आवश्यकता है।
- वित्तीय प्रौद्योगिकी में नवप्रवर्तन आवश्यक हैं।
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