भारत को, नागरिकों के वैयक्तिक दत्त (डेटा) निरापद और संरक्षित रखते हुए, डिजिटल अर्थव्यवस्था की संवृद्धि को सुनिश्चित करना चाहिए। कोई भी, ऐसे वातावरण में जहाँ निगरानी होती है, या ऐसी जगह में जहाँ किसी व्यक्ति की निजी जानकारी संकट में हों, नवप्रवर्तन नहीं करेगा। दत्त का मूलभूत नियंत्रण उन्हीं व्यक्तियों के पास होना चाहिए जिनसे ये सृजित होते हैं; उन्हें ही उनको, जैसा वे चाहें, उपयोग के लिए सुलभ, प्रतिबंधित या मुद्रिकृत करना चाहिए। इसलिए, दत्त संरक्षण कानूनों द्वारा सही प्रकार का नवप्रवर्तन, जो प्रयोक्ता-केन्द्रित और निजता-संरक्षी हो, सुकर होना चाहिए।
उपर्युक्त परिच्छेद के आधार पर, निम्नलिखित पूर्वधारणाएँ बनाई गई हैं :
- निजता का संरक्षण मात्र अधिकार नहीं है, बल्कि इसका अर्थव्यवस्था के लिए मूल्य है।
- निजता और नवप्रवर्तन के बीच एक आधारभूत कड़ी है।
उपर्युक्त पूर्वधारणाओं में से कौन-सी वैध है/हैं ?
उपर्युक्त परिच्छेद के आधार पर, निम्नलिखित पूर्वधारणाएँ बनाई गई हैं :
- निजता का संरक्षण मात्र अधिकार नहीं है, बल्कि इसका अर्थव्यवस्था के लिए मूल्य है।
- निजता और नवप्रवर्तन के बीच एक आधारभूत कड़ी है।
उपर्युक्त पूर्वधारणाओं में से कौन-सी वैध है/हैं ?