यदि सामाजिक असमानता भारत में तीव्रतम रूप से महसूस की गई सामाजिक समस्या है, तो असुरक्षा, गरीबी से भी अधिक, तीव्रतम रूप से महसूस की गई आर्थिक समस्या है। जो लोग शासकीय गरीबी रेखा के नीचे हैं, और उनके अतिरिक्त वे भी, जो गरीबी रेखा के ठीक-ठीक ऊपर हैं, अनेक प्रकार की (संपत्ति और/अथवा स्वास्थ्य जोखिमों, बाजार में घट-बढ़, रोजगार-संबंधी अनिश्चितताओं के कारण) विभिन्न आर्थिक असुरक्षाओं से प्रभावित हैं। अनेक सरकारी नीतियों का लक्ष्य वास्तव में इन असुरक्षाओं का न्यूनीकरण है।
उपर्युक्त परिच्छेद के सन्दर्भ में, निम्नलिखित पूर्वधारणाएँ बनाई गई हैं :
- I. गरीबी रेखा से ऊपर के लोगों की भी आर्थिक असुरक्षा के बारे में चिंताग्रस्त होने की प्रवृत्ति होती है।
- II. गरीबी के उन्मूलन के परिणामस्वरूप देश में सामाजिक समानता और शान्ति हो सकती है।
उपर्युक्त पूर्वधारणाओं में से कौन-सी वैध है/हैं ?
उपर्युक्त परिच्छेद के सन्दर्भ में, निम्नलिखित पूर्वधारणाएँ बनाई गई हैं :
- I. गरीबी रेखा से ऊपर के लोगों की भी आर्थिक असुरक्षा के बारे में चिंताग्रस्त होने की प्रवृत्ति होती है।
- II. गरीबी के उन्मूलन के परिणामस्वरूप देश में सामाजिक समानता और शान्ति हो सकती है।
उपर्युक्त पूर्वधारणाओं में से कौन-सी वैध है/हैं ?