यदि जनसंख्या वृद्धि के प्रतिरूप में असमानता है, तो खाद्य उत्पादन और उपयोग में उससे भी अधिक असमानता है। जैसे-जैसे समाज अधिक धनी होते जाते हैं, उनका पशु उत्पादों का उपभोग बढ़ता जाता है। इसका अर्थ है, कि दाना और फलियों जैसी मूलभूत खाद्य-सामग्री का बड़ा भाग, जो मनुष्यों का सीधे भरण कर सकता था, वह इसके बजाय कुक्कुट-पालन और बड़े फार्म पशुओं के चारे में बदला जा रहा है। तथापि पादप-आधारित आहार का मनुष्यों के लिए पशु आहार में यह परिवर्तन फलदायी होने से काफी दूर है। हमें कुक्कुटों को खाने से, उन्हें खिलाई गई कैलोरी का केवल 16% भाग ही वापस मिल पाता है। बड़े पशुओं में, जिन्हें पशुवध से पहले उनमें वसा और कुछ प्रोटीन शामिल करने के लिए दाना खिलाया जाता है, यह परिवर्तन दर और कम हो कर पाँच से लेकर सात प्रतिशत तक रह जाती है।
उपर्युक्त परिच्छेद के सन्दर्भ में, निम्नलिखित पूर्वधारणाएँ बनाई गई हैं :
- I. प्रत्येक देश में खाद्य विनिर्माण और प्रसंस्करण उद्योग को अपने उद्देश्यों और पद्धतियों को समाजों की बदलती हुई आवश्यकताओं के अनुसार उससे संगत रूप में रखना चाहिए।
- II. समृद्धतर समाज, अपने कृषि उत्पादों के अप्रत्यक्ष उपयोग के कारण खाद्य सामग्रियों की कैलोरियों में भारी हानि उठाने की ओर प्रवृत्त होते हैं।
उपर्युक्त पूर्वधारणाओं में से कौन-सी वैध है/हैं?
उपर्युक्त परिच्छेद के सन्दर्भ में, निम्नलिखित पूर्वधारणाएँ बनाई गई हैं :
- I. प्रत्येक देश में खाद्य विनिर्माण और प्रसंस्करण उद्योग को अपने उद्देश्यों और पद्धतियों को समाजों की बदलती हुई आवश्यकताओं के अनुसार उससे संगत रूप में रखना चाहिए।
- II. समृद्धतर समाज, अपने कृषि उत्पादों के अप्रत्यक्ष उपयोग के कारण खाद्य सामग्रियों की कैलोरियों में भारी हानि उठाने की ओर प्रवृत्त होते हैं।
उपर्युक्त पूर्वधारणाओं में से कौन-सी वैध है/हैं?