केवल 50 वर्षों में ही, विश्व का कच्चे माल का उपभोग चार गुना के आसपास, 100 बिलियन टन से अधिक हो गया है। इसके 9% से कम भाग को पुनः उपयोग में लाया जाता है। पुराने वाहनों की बैटरियों में लिथियम, कोबाल्ट, मैंगनीज़ और निकेल जैसे द्रव्य होते हैं जो कीमती हैं और जिन्हें प्राप्त करना दुष्कर हो सकता है। पूर्ति श्रृंखलाएँ लंबी और जटिल हैं। पुरितार्ताओं के निकृष्ट वातावरणीय और श्रम मानक उनके खरीददारों के जोखिम को बढ़ा देते हैं। सामग्रियों के पुनः उपयोग करने में समझदारी है। एक बार जब बैटरियाँ अपने जीवन के अंतिम चरण पर पहुँच जाएँ, उन्हें पुनः फैक्टरी में ले जा कर उनके संघटकों को पुनः प्राप्त किया जा सकता है और नई बैटरियों में डाला जा सकता है।
उपर्युक्त परिच्छेद के सन्दर्भ में, निम्नलिखित पूर्वधारणाएँ बनाई गई हैं :
- I. वाहन फैक्टरियाँ चक्रीय अर्थव्यवस्था के उदाहरण हैं।
- II. आर्थिक संवृद्धि खनिज संसाधनों के चक्रीय उपयोग से सुसंगत होती है।
उपर्युक्त पूर्वधारणाओं में से कौन-सी वैध है/हैं ?
उपर्युक्त परिच्छेद के सन्दर्भ में, निम्नलिखित पूर्वधारणाएँ बनाई गई हैं :
- I. वाहन फैक्टरियाँ चक्रीय अर्थव्यवस्था के उदाहरण हैं।
- II. आर्थिक संवृद्धि खनिज संसाधनों के चक्रीय उपयोग से सुसंगत होती है।
उपर्युक्त पूर्वधारणाओं में से कौन-सी वैध है/हैं ?