हमारे निवेश निर्णयों में से सबसे महत्वपूर्ण होता है संपत्ति का विनिधान, और दुःख की बात है कि हम में से अधिकांश इस निर्णय को उतना महत्व नहीं देते जितना चाहते हैं। हम अपने भविष्य की पूर्वानुमेयता तलाशने के लिए अडिग हैं। हमारी सोच जोखिम-भरी संपत्तियों में निवेश के लिए अत्यधिक चपल एवं मूल्य क्षयण के प्रति अभिमुखित है। हम निवेश के अस्थिर
प्रतिफल एवं नियंत्रण-लोप को भी पसंद नहीं करते। हम सोचते हैं कि हमारे धन का निष्क्रिय, अनुत्पादक रहना बेहतर है, पर वह सुरक्षित रहे। परंतु ऐसी कोई संपत्ति नहीं है जो जोखिम-मुक्त हो। हम अपने रोजगार खो सकते हैं, हमारे घर अपना मूल्य खो सकते हैं, हमारे बैंक दिवालिये हो सकते हैं, हमारे बॉन्ड भुगतान से चूक सकते हैं, सरकार गिर सकती है और हमारे मन मुताबिक चुनी हुई कम्पनियों का अस्तित्व समाप्त हो सकता है। पर हम यह मानकर जीवन नहीं जी सकते कि ये सभी चरम घटनाएँ और वो भी सभी एक साथ घटित होने के लिए तैयार बैठी हैं। हम जानते हैं कि जोखिम के ये सभी चरम स्वरूप एक साथ प्रकट नहीं होंगे।
निम्न कथनों में से कौन-सा एक परिच्छेद के लेखक द्वारा दी गई सलाह को श्रेष्ठ रूप से निहित करता है?
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