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Q. 24
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जब तक वित्तीय तंत्र स्थापित न हो जाए तब तक हमारे शहरी निकाय संभवतः हमारे शहरों में जलापूर्ति की धारणीय व्यवस्था सुनिश्चित नहीं कर सकते। जलापूर्ति के लिए प्राकृतिक स्रोतों से जल संचित करने, उसे पीने-योग्य बनाने की अभिक्रिया, तथा उपभोक्ताओं तक उसकी आपूर्ति करने के लिए पाइपों के जल-वितरण नेटवर्क बिछाने में भारी निवेश की आवश्यकता होती है। उसमें मल-प्रबंधन अधःसंरचना एवं मल-जल अभिक्रिया संयंत्रों में भी निवेश की आवश्यकता होती है, जिससे मल-प्रणाल अपशिष्ट जल को इन संयंत्रों तक ले जा सकें और यह सुनिश्चित किया जा सके कि असंसाधित मल-जल प्राकृतिक जल निकास्यों में बिलकुल ही नहीं छोड़ा जाए। यदि हमारे शहर इतने समृद्ध होते कि वो पूरी

लागत को बहन कर सकते तो जल की निःशुल्क पूर्ति की जा सकती है। वे ऐसे नहीं हैं।

24. परिच्छेद द्वारा संप्रेषित सर्वाधिक तार्किक और निणायिक संदेश क्या है?

  • (a) शहरी स्थानीय निकायों को उपभोक्ता शुल्कों के माध्यम से लागत वसूलनी चाहिए।
  • (b) शहरी स्थानीय निकाय हमारे शहरों की जल आवश्यकताओं को पूर्ण करने के लिए पर्याप्त रूप से दक्ष नहीं हैं।
  • (c) हमारे शहरों में जल का अभाव एक चिरस्थायी समस्या है जिसका समाधान सम्भव नहीं है।
  • (d) हमारे शहरों में जल-संकट की दृष्टि से यह बहुत आवश्यक है कि शहरों में जनसंख्या का एक अधिकतम आकार निर्धारित कर शहरों की जनसंख्या को सीमित किया जाए।

25. उपर्युक्त परिच्छेद के संदर्भ में, निम्नलिखित पूर्वधारणाएँ बनाई गई हैं :

24. परिच्छेद द्वारा संप्रेषित सर्वाधिक तार्किक और निणायिक संदेश क्या है?

A

शहरी स्थानीय निकायों को उपभोक्ता शुल्कों के माध्यम से लागत वसूलनी चाहिए।

B

शहरी स्थानीय निकाय हमारे शहरों की जल आवश्यकताओं को पूर्ण करने के लिए पर्याप्त रूप से दक्ष नहीं हैं।

C

हमारे शहरों में जल का अभाव एक चिरस्थायी समस्या है जिसका समाधान सम्भव नहीं है।

D

हमारे शहरों में जल-संकट की दृष्टि से यह बहुत आवश्यक है कि शहरों में जनसंख्या का एक अधिकतम आकार निर्धारित कर शहरों की जनसंख्या को सीमित किया जाए।

Kepler. Discussing PYQs. Q.no. 24