निजी निवेश सामान्यतः चपल है। विदेशी निजी निवेश और भी अधिक चपल है क्योंकि उनके लिए उपलब्ध निवेश विकल्प काफी अधिक हैं (अर्थात्, समूचा संसार)। इसलिए रोज़गार देने का दायित्व विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) पर नहीं छोड़ा जा सकता। सांप्रतिक FDI अंतर्वाह सभी समय और सभी सेक्टरों तथा क्षेत्रों के संदर्भ में चपल होता है, जो उनके अधिकतम प्रतिफल की तलाश का आवश्यक परिणाम है। अस्थिर रोज़गार और आय एवं क्षेत्रीय असमानताओं का प्रबलन उसके दुष्परिणाम हैं। विदेशी निवेश का एक संभावित सकारात्मक परिणाम है नई प्रौद्योगिकी का अंतर्वाहन और उसका अनुवर्ती विसरण। तथापि, प्रौद्योगिकी विसरण एकदम सुनिश्चित नहीं है, क्योंकि विसरण के लिए भारत में भौतिक एवं मानवीय पूँजी की वर्तमान स्थिति अपर्याप्त साबित हो सकती है।
उपर्युक्त परिच्छेद के संदर्भ में, निम्नलिखित पूर्वधारणाएँ बनाई गई हैं :
- दीर्घकाल में विदेशी निवेश पर भरोसा करना आर्थिक रूप से एक सही नीति नहीं है।
उपर्युक्त परिच्छेद के संदर्भ में, निम्नलिखित पूर्वधारणाएँ बनाई गई हैं :
- दीर्घकाल में विदेशी निवेश पर भरोसा करना आर्थिक रूप से एक सही नीति नहीं है।