प्रतिवर्ष जून से सितम्बर के चार महीनों के दौरान होने वाले मानसूनी प्रवाहों के अत्यधिक विषम, ऋतुनिष्ठ एवं स्थानिक वितरण के उपयोग के कई अवसरों को खोया जा चुका है। चूँकि इन कुछ महीनों में ही अधिकांश वृष्टि होती है एवं परिणामतः स्वच्छ जल उपलब्ध होता है, जलाशयों में वर्षा के जल के संचयन की आवश्यकता और बाद में वर्ष-भर उपयोग हेतु छोड़ना, एक ऐसी अनिवार्यता है जिसकी कोई उपेक्षा नहीं कर सकता। जलवायु परिवर्तन मौसम की स्थितियों को सदा प्रभावित करता रहेगा और जल की अल्पता तथा इसके आधिक्य को उत्पन्न करेगा। जहाँ लाखों लोग सूखे एवं बाढ़ से पीड़ित होते हैं वहीं देश की कई
नदियों में पानी अप्रयुक्त बहता रहता है और प्रत्येक वर्ष समुद्र में बह जाता है।
22. उपर्युक्त परिच्छेद के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा भारत की दृष्टि से सर्वाधिक तर्कसंगत एवं व्यावहारिक निहितार्थ हो सकता है?
22. उपर्युक्त परिच्छेद के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा भारत की दृष्टि से सर्वाधिक तर्कसंगत एवं व्यावहारिक निहितार्थ हो सकता है?
- नदियों के अंतःसंबंधन को प्रारंभ किया जाना चाहिए।
- जल के यथोचित वितरण के लिए पूरे देश में बाँधों एवं नहरों के नेटवर्क का निर्माण किया जाना चाहिए।
- कृषकों को बोरवेल की खुदाई के लिए सुलभ ऋण दिया जाना चाहिए।
- कृषि में जल के प्रयोग को कानूनी रूप से नियंत्रित किया जाना चाहिए।
- केन्द्र सरकार द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में नदियों के जल के वितरण को नियंत्रित किया जाना चाहिए।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
22. उपर्युक्त परिच्छेद के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा भारत की दृष्टि से सर्वाधिक तर्कसंगत एवं व्यावहारिक निहितार्थ हो सकता है?
- नदियों के अंतःसंबंधन को प्रारंभ किया जाना चाहिए।
- जल के यथोचित वितरण के लिए पूरे देश में बाँधों एवं नहरों के नेटवर्क का निर्माण किया जाना चाहिए।
- कृषकों को बोरवेल की खुदाई के लिए सुलभ ऋण दिया जाना चाहिए।
- कृषि में जल के प्रयोग को कानूनी रूप से नियंत्रित किया जाना चाहिए।
- केन्द्र सरकार द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में नदियों के जल के वितरण को नियंत्रित किया जाना चाहिए।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।