दलहन की प्रजाति 'पूसा अरहर 16' को पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के धान उगाने वाले क्षेत्रों और अंततः सम्पूर्ण भारत में उगाए जा सकने की संभावना है। उसकी उत्पादकता (लगभग 2000 कि० ग्रा०/हेक्टेयर) उपलब्ध प्रजातियों की तुलना में महत्वपूर्ण रूप से अधिक होगी और चूँकि उसके आकार में एकरूपता होगी, उसकी कटाई मशीनों से भी संभव होगी एवं उत्तरी भारत के उन कृषकों, जो आजकल इस तकनीक का प्रयोग धान के लिए करते हैं, के लिए एक आकर्षक विशेषता होगी। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि अरहर का पुआल, धान के पुआल के विपरीत, हरा होता है और उसे मृदा में वापस जोता जा सकता है। धान के पुआल में परेशानी यह है कि सेलखड़ी (silica) की मात्रा अधिक होती है जो आसानी से उसका अपघटन नहीं होने देती। अरहर में कंबाइन कटाई के बाद भी कृषक को बचे हुए पुआल को छोटे टुकड़ों में काटने के लिए केवल रोटोवेटर चलाने की आवश्यकता होती है जिन्हें वापस जोता जा सकता है और जो बहुत तेजी से अपघटित हो जाते हैं। यह कार्य धान के बचे हुए डंठलों के साथ कठिन है जिन्हें आसानी से निकाला या वापस नहीं जोता जा सकता। इसलिए, कृषक साधारणतः इसे जलाने का आसान रास्ता चुनते हैं।
निम्नलिखित में से कौन-से ऐसे सर्वाधिक तर्कसंगत निष्कर्ष हैं जो उपर्युक्त परिच्छेद से निकाले जा सकते हैं?
- धान की तुलना में दलहन उगाने से कृषकों की आय अधिक होगी।
- दलहन उगाना, धान उगाने की तुलना में कम प्रदूषण उत्पन्न करता है।
- दलहन के पुआल का प्रयोग मृदा की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए किया जा सकता है।
- उत्तरी भारत की कृषि के संदर्भ में, धान के पुआल की कोई उपयोगिता नहीं है।
- मशीनीकृत खेती दूँठ जलाने का प्रमुख कारक है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
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- धान की तुलना में दलहन उगाने से कृषकों की आय अधिक होगी।
- दलहन उगाना, धान उगाने की तुलना में कम प्रदूषण उत्पन्न करता है।
- दलहन के पुआल का प्रयोग मृदा की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए किया जा सकता है।
- उत्तरी भारत की कृषि के संदर्भ में, धान के पुआल की कोई उपयोगिता नहीं है।
- मशीनीकृत खेती दूँठ जलाने का प्रमुख कारक है।
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