जीनोम संपादन, जीनोम रूपांतरण से भिन्न है। जीनोम संपादन विशेष रूप से पादप जीनोम के उस भाग का पता लगाने से संबंधित है जिसको परिवर्तित किया जा सके जिससे रोग की भेद्यता कम की जा सके या कुछ शाकनाशियों के विरुद्ध प्रतिरोधी बनाया जा सके या उत्पादकता बढ़ाई जा सके। शोधकर्ता जीनोम का विच्छेदन करने के लिए 'आण्विक कैंची' का उपयोग करते हैं और इसकी मरम्मत करते हैं जो कि पादपों में होने वाली वह प्राकृतिक प्रक्रिया है, जो पादप रोगों के आक्रमण के अधीन होने पर नए उत्परिवर्तनों को उत्पन्न कर सकती है, जो कि उस पादप को भविष्य में होने वाले आक्रमणों से बचे रहने में सक्षम बनाता है। अब जबकि प्रयोगशालाओं में पादप जीनोम का विस्तार से परीक्षण करना संभव है और संगत जीनों को सुस्पष्ट रूप में परिवर्तित करने की क्रियाविधि का सृजन किया जा सकता है, इस विकास प्रक्रिया में प्रभावी रूप से तेजी लाई जा सकती है।
उपर्युक्त परिच्छेद के संदर्भ में, निम्नलिखित पूर्वधारणाएँ बनाई गई हैं :
- जीनोम संपादन में एक पादप से दूसरे पर जीनों के स्थानांतरण की आवश्यकता नहीं है।
- जीनोम संपादन के द्वारा चुनी हुई जीनों को सही रूप में एक प्राकृतिक प्रक्रिया के रूप में परिवर्तित किया जा सकता है जिससे पौधों को पर्यावरण तत्वों के साथ अनुकूलित होने में सहायता मिलती है।
उपर्युक्त में से कौन-सी पूर्वधारणा/पूर्वधारणाएँ वैध है/हैं?
उपर्युक्त परिच्छेद के संदर्भ में, निम्नलिखित पूर्वधारणाएँ बनाई गई हैं :
- जीनोम संपादन में एक पादप से दूसरे पर जीनों के स्थानांतरण की आवश्यकता नहीं है।
- जीनोम संपादन के द्वारा चुनी हुई जीनों को सही रूप में एक प्राकृतिक प्रक्रिया के रूप में परिवर्तित किया जा सकता है जिससे पौधों को पर्यावरण तत्वों के साथ अनुकूलित होने में सहायता मिलती है।
उपर्युक्त में से कौन-सी पूर्वधारणा/पूर्वधारणाएँ वैध है/हैं?