भारत में, प्राधिकारी मानसून ऋतु में जलाशयों में अधिकतम जल संचय करने की कोशिश करते हैं, जिसे गर्मी के महीनों में सिंचाई एवं विद्युत् उत्पादन के लिए प्रयोग में लाया जाता है। मानसून ऋतु आने के समय जलाशय में जल को एक निश्चित स्तर से नीचे बनाए रखना एक अंतर्राष्ट्रीय रूप में स्वीकार्य प्रथा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि जब मानसून की वर्षा होती है तो अतिरेक वर्षा जल के संचयन के लिए जगह हो तथा जल को नियंत्रित रूप में छोड़ा भी जा सके। परंतु प्राधिकारी मानसून के समाप्त होने से पहले ही जलाशयों में अधिक-से-अधिक जल संचय कर लेते हैं, जिससे अधिक विद्युत् उत्पादन एवं सिंचाई सुनिश्चित की जा सके।
उपर्युक्त परिच्छेद के संदर्भ में, निम्नलिखित पूर्वधारणाएँ बनाई गई हैं :
- भारत की अर्थव्यवस्था को वैश्विक अर्थव्यवस्था से अत्यधिक समेकित करने की आवश्यकता है ताकि रोज़गार का बड़ी संख्या में सृजन किया जा सके तथा इसके वृद्धि संवेग को बनाए रखा जा सके।
- आर्थिक उदारीकरण से बृहत् आर्थिक वृद्धि होगी जिससे दीर्घकाल में गरीबी घटेगी और रोज़गार का पर्याप्त सृजन होगा।
उपर्युक्त में से कौन-सी पूर्वधारणा/पूर्वधारणाएँ वैध है/हैं?
उपर्युक्त परिच्छेद के संदर्भ में, निम्नलिखित पूर्वधारणाएँ बनाई गई हैं :
- भारत की अर्थव्यवस्था को वैश्विक अर्थव्यवस्था से अत्यधिक समेकित करने की आवश्यकता है ताकि रोज़गार का बड़ी संख्या में सृजन किया जा सके तथा इसके वृद्धि संवेग को बनाए रखा जा सके।
- आर्थिक उदारीकरण से बृहत् आर्थिक वृद्धि होगी जिससे दीर्घकाल में गरीबी घटेगी और रोज़गार का पर्याप्त सृजन होगा।
उपर्युक्त में से कौन-सी पूर्वधारणा/पूर्वधारणाएँ वैध है/हैं?