अनेक आनुभविक अध्ययनों से पता चलता है कि कृषक जोखिम उठाने के अनिच्छुक होते हैं, यद्यपि अनेक मामलों में ऐसा मामूली रूप से पाया जाता है । यह दर्शाने के भी प्रमाण हैं कि कृषकों की जोखिम उठाने की अनिच्छुकता ऐसे फसल प्रतिरूपों और निविष्टि उपयोग में परिणत होती है, जो आय को अधिकतम करने के स्थान पर जोखिम को कम करने हेतु अभिकल्पित हैं । कृषक, कृषिगत जोखिमों को संभालने
और उनका सामना करने के लिए अनेक रणनीतियाँ अपनाते हैं। इनके अंतर्गत, फसल एवं जोतों का विविधीकरण, गैर-कृषि रोजगार, माल का भंडारण एवं परिवार के सदस्यों का रणनीतिक प्रवास, इत्यादि पद्धतियाँ सम्मिलित हैं। बँटाई काश्तकारी से लेकर नातेदारी, विस्तारित परिवार तथा अनौपचारिक ऋण अभिकरण जैसी संस्थाएँ भी हैं। कृषकों द्वारा जोखिम उठाने में एक प्रमुख बाधा यह है कि एक ही प्रकार के जोखिम उस क्षेत्र में बड़ी संख्या में किसानों को प्रभावित कर सकते हैं। आनुभविक अध्ययन यह दिखाते हैं कि परंपरागत तरीके पर्याप्त नहीं हैं। अतः नीतिगत हस्तक्षेप आवश्यक है, विशेषकर ऐसे उपाय जो विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में एकसमान कारगर हों।
नीतियों का उद्देश्य प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से कृषिगत जोखिमों का मुकाबला करना हो सकता है। विशेषतः जोखिम को ध्यान में रखकर बनी नीतियों के उदाहरण हैं, फसलों का बीमा, कीमत स्थिरीकरण और ऐसी किसमों का विकास जिनमें कीटों और बीमारियों के प्रति प्रतिरोधशक्ति हो। सिंचाई, आर्थिक सहायता प्राप्त ऋण एवं सूचना तक पहुँच ऐसी नीतियाँ हैं जो जोखिम को अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती हैं। विशेषतः जोखिम पर ध्यान देने वाली ऐसी कोई अकेली नीति नहीं है जो इसे घटाने हेतु पर्याप्त हो और जिसके पार्श्व-प्रभाव न हों, जबकि ऐसी नीतियाँ जो विशेष तौर पर जोखिम से सम्बद्ध न हों, सामान्य स्थिति पर प्रभाव डालती हैं एवं जोखिमों को केवल अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती हैं। फसल बीमा पर, प्रत्यक्ष रूप से कृषिगत जोखिम को साधने के एक नीतिगत उपाय के रूप में, भारत एवं अन्य अनेक विकासशील देशों के संदर्भ में, सावधानीपूर्वक विचार करने की आवश्यकता है - क्योंकि बहुसंख्यक कृषक वर्षा-सिंचित कृषि पर निर्भर हैं और अनेक क्षेत्रों में उनकी आय अस्थिरता का मुख्य कारण उपज में अस्थिरता है।
कृषि में जोखिम घटाने हेतु नीतिगत हस्तक्षेप की आवश्यकता इसलिए है, क्योंकि
कृषि में जोखिम घटाने हेतु नीतिगत हस्तक्षेप की आवश्यकता इसलिए है, क्योंकि